बिलासपुर। Highcourt News Bilaspur: एनजीटी एक्ट में अपील के लिए निर्धारित समय-सीमा के प्रविधान की संवैधानिकता को चुनौती देने वाली याचिका पर मंगलवार को केंद्र सरकार ने जवाब प्रस्तुत कर दिया है। इस पर याचिकाकर्ता को प्रतिजवाब प्रस्तुत करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया गया है। अब मामले की सुनवाई पांच अक्टूबर को होगी। मामले की सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने केंद्र व राज्य शासन से जवाब मांगा था। पिछली सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने जवाब नहीं दिया था। इसके चलते मामले की सुनवाई बढ़ा दी गई थी। मंगलवार को प्रकरण की सुनवाई हुई। इस दौरान केंद्र सरकार ने जवाब प्रस्तुत करते हुए एक्ट की वैधानिकता का समर्थन किया है। वहीं याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने प्रतिजवाब प्रस्तुत करने के लिए दो सप्ताह का समय मांगा।

इसके चलते सुनवाई अक्टूबर तक के लिए बढ़ा दी गई है। मालूम हो कि आदिवासी समाज के नेता व सामाजिक कार्यकर्ता संत कुमार नेताम ने अधिवक्ता सुदीप श्रीवास्तव के माध्यम से हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की है। इसमें एनजीटी एक्ट 2010 की धारा 16 के उस प्रविधान की संवैधानिकता को चुनौती दी गई है, जिसके अनुसार एनजीटी में अपील दायर करने की निर्धारित समय सीमा किसी भी आदेश के सार्वजनिक होने के बाद मात्र 30 दिनों की है।

यहां तक 30 दिनों के बाद 60 दिनों और इससे अधिक 90 दिनों तक नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल इस देरी को माफ कर अपील को सुन सकता है। लेकिन 90 दिनों के बाद इस आदेश के खिलाफ कोई अपील नहीं की जा सकती। एनजीटी एक्ट में किसी भी परियोजना के पर्यावरण अनुमति, वन अनुमति, वायु प्रदूषण अधिनियम के तहत अनुमति जल प्रदूषण अधिनियम एवं अन्य कई अनुमति के खिलाफ अपील दायर करने का अधिकार नागरिकों को मिला हुआ है।

एनजीटी एक्ट को कई अंतरराष्ट्रीय समझौतों और सुप्रीम कोर्ट के कई निर्णयों के पालन के आधार पर बनाया गया है। इस एक्ट के आने के बाद ज्यादातर हाई कोर्ट ने पर्यावरण एवं अन्य अनुमति को चुनौती देने वाली याचिकाओं को एनजीटी में ट्रांसफर कर दिया था।

वर्तमान में भी ऐसे मामलों को एनजीटी ही भेजने का आदेश दिया जाता है। इस तरह से 30 व 60 दिनों की अनुमति का प्रविधान एनजीटी एक्ट के उद्देश्यों के विपरीत और संविधान की धारा 14 और 21 का उल्लंघन बताया गया है।

Posted By: anil.kurrey

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