बिलासपुर (नईदुनिया प्रतिनिधि)।Highcourt News in Bilaspur: नगर निगम की सीमा में आने वाली सड़कों की जर्जर हालत को लेकर हाई कोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश प्रशांत मिश्रा ने अपनी पीड़ा व्यक्त की और लोक निर्माण विभाग के सचिव व नगर निगम आयुक्त को कड़ाई के साथ समयबद्ध तरीके से सड़कों को सुधारने का आदेश दिया है। हिमांक सलूजा ने बिलासपुर नगर निगम की सीमा के भीतर सड़कों की बदहाल स्थिति को सुधारने के लिए हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की है। इस मामले की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने पूर्व में सड़क सुधारने के लिए निश्चित तिथि बताने लोक निर्माण विभाग के सचिव व नगर निगम आयुक्त को शपथ पत्र प्रस्तुत करने एवं कोर्ट में उपस्थित होने का आदेश दिया था। गुस्र्वार को इस मामले की सुनवाई हुई। इस दौरान युगलपीठ ने कहा कि शहर की जनता सड़कों की दुर्दशा से त्रस्त हैं और खराब सड़कों पर चलने के लिए मजबूर हैं। इससे कभी भी दुर्घटना हो सकती है।

पीडब्ल्यूडी व निगम के कार्यों की समीक्षा करेंगे न्यायमित्र

इस मामले की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने लोक निर्माण विभाग व नगर निगम के कार्यों की समीक्षा करने के लिए वकीलों को न्यायमित्र नियुक्त कर समिति गठित की है। इसमें वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव श्रीवास्तव, प्रतीक शर्मा व राघवेंद्र प्रधान को शामिल किया गया है। उनके साथ वरिष्ठ अधिवक्ता व उपमहाधिवक्ता विवेकरंजन तिवारी, गगन तिवारी व पंकज अग्रवाल इस समिति के साथ सड़क सुधार कार्य की प्रगति का निरीक्षण करेंगे।

पूर्व में भी दायर की गई थी जनहित याचिका, फिर भी हालत जस की तस

भूतपूर्व सैनिक कल्याण संघ के पदाधिकारी डा. आरएस त्रिपाठी, डा. शेखर तिवारी और डा. प्रदीप सिहारे ने वर्ष 2012 में सीवरेज के लिए सड़कों की अव्यवस्थित खुदाई, ड्रेनेज समस्या, बरसात में पूरे शहर में जल जमाव, बेजाकब्जा व अव्यवस्थित यातायात को लेकर हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की थी। इसे हाई कोर्ट ने गंभीरता से लेते हुए नगर निगम, कलेक्टर बिलासपुर, लोक निर्माण विभाग सहित अन्य को नोटिस जारी कर जवाब मांगा। इस मामले में समय-समय पर कोर्ट ने लोक निर्माण विभाग व नगर निगम को शहर की हालत सुधारने के लिए दिशा-निर्देश दिए थे। लेकिन आज भी अव्यवस्थित खोदाई, ड्रेनेज समस्या, बारिश में जलभराव व यातायात की समस्या बरकरार है।

पीडब्ल्यूडी व नगर निगम में समन्वय का अभाव

दरअसल नगर निगम में बिना किसी प्लान के कई मार्गों का डामरीकरण प्रारंभ कर दिया जाता है। नई बनी सड़क को कभी सीवरेज पाइप लाइन तो कभी जल अमृत मिशन के नाम से खोद दिया जाता है। इसी तरह टेलीफोन केबल, नाला निर्माण के लिए फिर सड़कों को खोद दिया जाता है। इस तरह से अव्यवस्थित कार्य को लेकर स्र्पयों की बर्बादी होती है और सड़कांे की दुुर्दशा होती है।

ठेका कंपनियों की रहती है जिम्मेदारी

आमतौर पर नगर निगम द्वारा कराए जा रहे कार्यों के दौरान पीडल्ब्यूडी की सड़कों को खोदने के लिए प्रविधान के अनुसार नगर निगम के साथ ही पीडब्ल्यूडी से अनुमति लेनी होती है। इसके साथ ही जिस कार्य के लिए सड़कों की खोदाई की जाती है उसकी ठेका कंपनी को सड़क को दुरुस्त करने की जिम्मेदारी दी जाती है। लेकिन नगर निगम में वर्तमान में जल अमृत मिशन के तहत सड़कों की बेतरतीब खोदाई की जा रही है। इसके चलते लोक निर्माण विभाग की नई सड़कों की हालत बदहाल हो गई है। वहीं ठेका कंपनी सड़कों की मरम्मत करने के लिए कोई ध्यान नहीं दे रही है। निगम भी इन मामलों में उदासीनता बरतती है और शहर की जनता को परेशान होना पड़ रहा है।

Posted By: anil.kurrey

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