बिलासपुर। दहेज के लिए पत्नी को प्रताड़ित करने और इसी प्रताड़ना के चलते पत्नी को आत्महत्या के लिए विवश करने का आरोप झेल रहे पति को 22 साल बाद राहत मिली है। मामले की सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ता की याचिका को स्वीकार करते हुए दोषमुक्त कर दिया है। मृतका के स्वजनों द्वारा लगाए गए आरोप के आधार पर पुलिस की कार्रवाई और निचली अदालत के फैसले को चुनौती देते हुए अपने वकील के जरिये छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी।

बिलासपुर चकरभाठा थाना क्षेत्र निवासी अशोक कुमार की बेटी हर्षलता की पेंडारी निवासी लक्ष्मीकांत से वर्ष 1997 में शादी हुई थी। मृतका के पिता ने आरोप लगाया था कि शादी के पहले से ही लक्ष्मीकांत ने दहेज़ में स्कूटर की मांग की थी। पिता ने स्कूटर के बजाय लूना देने की बात कही थी। शादी के वक्त उसने वादे के मुताबिक लूना दिया। लक्ष्मीकांत पर यह भी आरोप लगाया कि विवाह के दौरान उसने 10 ग्राम सोना, आलमारी, सोफा सेट, टीवी और नगद रकम की मांग की थी।

विवाह के दौरान दोनों पक्षों के स्वजनों की समझाइश के बाद शादी की रस्में पूरी की गईं। कुछ दिनों बाद ही विवाहिता पति पर दहेज के लिए प्रताड़ित करने का आरोप लगाती हुई मायके वापस आ गई। लगातार चलते विवाद के बीच शादी के छह महीने के भीतर ही हर्षलता ने आत्महत्या कर ली। बेटी की मौत के बाद पिता ने चकरभाठा थाने में दामाद लक्ष्मीकांत और स्वजनों के खिलाफ दहेज प्रताड़ना की रिपोर्ट दर्ज कराई।

मामले की सुनवाई के बाद निचली अदालत ने आरोपित लक्ष्मीकांत को सजा सुनाई। निचली अदालत के फैसले को चुनौती देते हुए लक्ष्मीकांत ने अपने वकील के जरिये छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। मृतका हर्षलता के पत्र के आधार पर वकीलों ने कोर्ट के समक्ष तर्क पेश किया। मामले की सुनवाई सिंगल बेंच में हुई। प्रकरण की सुनवाई के बाद कोर्ट ने याचिकाकर्ता को दहेज हत्या के मामले से बरी कर दिया है। चकरभाठा पुलिस ने मृतका के पिता की रिपोर्ट के आधार पर लक्ष्मीकांत के खिलाफ जुर्म दर्ज करते हुए जेल भेज दिया था। मामला वर्ष 1998-99 का है।

Posted By: sandeep.yadav

NaiDunia Local
NaiDunia Local