बिलासपुर (नईदुनिया प्रतिनिधि)।Illegal Sand Mining: अरपा नदी में अब भी चोरी छीपे रेत उत्खनन का काम चल रहा है। रेत घाटों में माफियाओं के गुर्गों की दखलंदाजी इतनी ज्यादा है कि ग्रामीण शिकायत करने से भी घबराते हैं। जिन घाटों को उत्खनन और परिवहन के लिए लीज पर दिया गया है वहां नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के दिशा-निर्देशों के साथ ही पर्यावरण संरक्षण मंडल के नियमों की लगातार अनदेखी की जा रही है। बारिश के दिनों में रेत की खोदाई कर अब निजी व सरकारी जमीन पर डंपिंग का खेल चल रहा है।

राज्य शासन ने प्रदेशभर के रेत घाटों को चिन्हांकित कर ई आक्शन के जरिए तीन साल के लिए ठेके पर दे दिया है। रेत घाटों को ठेके पर लेने के लिए पहली बार जमकर प्रतिस्पर्धा देखी गई। शराब के ठेके से जुड़ी बड़ी लाबी भी इसमें आगे आ गई। जैसे ही यह लाबी आगे आई छोटे ठेकेदार दौड़ से बाहर हो गए। जिले के सभी घाटों में इनका ही कब्जा है। रेत के धंधे में लाबी के आते ही घाटों के आसपास का माहौल ही बदल गया।

खनिज विभाग ने जिन घाटों को चिन्हांकित कर तीन साल के लिए लीज पर दिया है उससे अलग इन लोगों ने नया घाट बना लिया है। अपने घाट को सुरक्षित रखते हुए आसपास की जगहों की रेत निकालने का खेल चल रहा है। कोनी, तुर्काडीह, मंगला, कछार, मधुबन व दयालबंद सहित आसपास के घाटों में अब भी बेतहाशा खोदाई की जा रही है। रेत खोदाई के बाद डंपिंग का खेल भी चल रहा है।

सरकारी व निजी जमीन में डंप है रेत

बारिश के दिनों में निर्माण कार्य करने वाले कालोनाइजर, बिल्डर्स व सरकारी कामकाज करने वाले ठेकेदारों को निर्माण सामग्री की जरूरत पड़ती है। गिट्टी, सीमेंट व ईंट आसानी से मिल जाते है। सबसे ज्यादा तकलीफ रेत की होती है। अब यह भी आसानी से मिल जा रही है।

शर्त बस इतनी है कि रेत के एवज में मोटी रकम खर्च करनी पड़ रही है। माफिया अब कालाबाजारी पर उतर आए हैं। अरपा सहित आसपास की नदियों से रेत निकालकर सरकारी व निजी जमीन पर डंप कर दिया है। डंपिंग के लिए खनिज विभाग से अनुमति भी नहीं ली गई है। बगैर अनुमति रेत के खेल में शामिल माफिया मनचाही कीमत पर रेत बेच रहे हैं।

Posted By: anil.kurrey

NaiDunia Local
NaiDunia Local