बिलासपुर(नईदुनिया प्रतिनिधि)। जिले के निजी स्कूल संचालक सरकारी योजनाओं का खुलेआम दुस्र्पयोग करते हुए शासन को लाखों का चूना लगा रहे हैं। शिक्षा के अधिकार के तहत जिन बच्चों ने निजी स्कूलों में दाखिला लिया था। अब वे वहां से टीसी निकलवा चुके हैं। इसके बावजूद स्कूल संचालक उन बच्चों के नाम से शासन से फीस की राशि वसूल रहे थे। ऐसे बच्चों की संख्या करीब पांच सौ है। ये बच्चे रिकार्ड में अभी भी अध्ययनरत हैं। मामला सामने आने के बाद डीईओ डीके कौशिक ने वसूली करने के निर्देश दिए।

आरटीई के तहत गरीब परिवार के बच्चों को प्राइवेट स्कूलों में निश्शुल्क शिक्षा दिलाने की व्यवस्था शासन द्वारा की गई है। ऐसे बच्चों को पढ़ाने के एवज में शासन द्वारा निजी स्कूलों को साल में एक बार निर्धारित शुल्क दिया जाता है। अधिकतम सात हजार पांच सौ रुपये मिलते हैं। जिले के कई निजी स्कूलों में आरटीई के तहत बच्चों ने प्रवेश लिया था। लेकिन कुछ कारणवश करीब पांच सौ बच्चों ने स्कूल से टीसी निकलवा चुके हैं। इसके बावजूद स्कूल संचालक शासन से पैसा वसूल रहे थे। इसकी शिकायत जिला शिक्षा अधिकारी डीके कौशिक से हुई। उन्होंने मामले की जांच करने के निर्देश दिए। जांच में पता चला कि आरटीई के तहत प्रवेश लेने वाले पांच सौ बच्चों ने पढ़ाई छोड़कर टीसी निकलवा चुके हैं।

चारों ब्लाक में बनाई थी जांच टीम

जिला शिक्षा अधिकारी ने आरटीई के तहत निजी स्कूलों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं के वैरिफिकेशन के निर्देश देते हुए चारों विकासखंडों में तीन-तीन सदस्यीय टीम बनाई थी। ब्लाक के सहायक विकासखंड शिक्षा अधिकारी, सहायक नोडल अधिकारी और एकाउंटेंट शामिल थे। वेरिफिकेशन के बाद डीईओ को जांच रिपोर्ट सौंपी गई। इसमें पता चला कि आरटीई के तहत जिले में पांच सौ छात्र-छात्राओं को फर्जी तरीके से शामिल किया गया है। डीईओ ने उन्हें अपात्र घोषित कर दिया है। साथ ही उनका नाम आरटीई के पोर्टल से हटा दिया गया है। अब छात्र-छात्राओं के नाम पर शासन उन स्कूलों को फीस जारी नहीं करेगी।

Posted By: Abrak Akrosh

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