बिलासपुर। मुख्य अतिथि छत्तीसगढ़ शासन मुख्यमंत्री के कृषि सलाहकार प्रदीप शर्मा ने कहा कि मिट्टी अनमोल है, मिट्टी से ही हमारा मोल है। इसको बनने में लाखो वर्ष लगते हैं। हमें हमारी धरोहर के रूप में संभाल कर रखना है एवं इसके संरक्षण एवं संवर्धन हेतु प्रयास करना होगा। आम लोगों को मिट्टी के बारे में जागरूक करना जरूरी है।

बैरिस्टर ठाकुर छेदीलाल कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र, बिलासपुर में "विश्व मृदा दिवस" के अवसर पर कृषक संगोष्ठी आयोजित किया गया था। संगोष्ठी को वचुर्अल रूप से संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि प्रदीप ने आगे कहा कि मिट्टी जीवन का आधार है । मिट्टी फसलों को पोषण तथा आधार प्रदान करती है, यदि मिट्टी स्वस्थ रहेगी तो फसलें स्वस्थ होंगी और मानव भी स्वस्थ रहेगा। संगोष्ठी की अध्यक्षता इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डा.एसएस सेंगर ने किया। इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि के रूप से कृषि विवि के प्रबंधन मंडल के सदस्य आनंद मिश्रा उपस्थित थे।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति डा. सेंगर ने कृषकों को संबोधित करते हुए कहा कि मिट्टी की देखभाल और जतन हमारे देश की परंपरा रही है। हमारे धर्म ग्रंथों में धरती को माता कहा गया है। अथर्ववेद में कहा गया है कि धरती हमारी माता है और हम इसकी संतान है। यजुर्वेद में कहां गया की हम धरती माता के कर्जदार है कि हमारा भार सहन की है और हमारा पोषण भी करती है। उन्होंने कहा कि धरती से हमें वे सारी वस्तुएं प्राप्त होती है

जो हमारे जीवन के लिए आवश्यक है। बढ़ती आबादी की पोषण आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए विगत कुछ वर्षों में खेती में उर्वरकों एवं कीटनाशकों के बेहिसाब उपयोग से मृदा का स्वास्थ्य खराब हो रहा है इसलिए उर्वरकों का संतुलित उपयोग किया जाना चाहिए जिससे मिट्टी की सेहत अच्छी बनी रहे। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि आनंद मिश्रा ने इस अवसर पर कहा की मिट्टी की सेहत को बनाए रखने के लिए खाद एवं उर्वरकों का संतुलित उपयोग किया जाना चाहिए। अब किसान फिर से जैविक खेती की ओर उन्मुख हो रहे हैं।

अधिष्ठाता कृषि महाविद्यालय डा.आरकेएस तिवारी ने इस अवसर पर कहा की मिट्टी में जब 45 प्रतिशत ठोस पदार्थ, पांच प्रतिशत जीवांश, 25 प्रतिशत पानी तथा 25 प्रतिशत वायु हो तब उसे स्वस्थ माना जाता है। जैविक खादों के उपयोग से मिट्टी का स्वास्थ सुधारा जा सकता है। मिट्टी परीक्षण अधिकारी स्मिता रात्रे ने किसानों से कहा कि वे मृदा स्वास्थ्य पत्रक के आधार पर खेतों की मिट्टी में पोषक तत्वों की उपलब्धता के आधार पर खाद एवं उर्वरकों का संतुलित मात्रा में उपयोग करें।

कृषि विज्ञान केंद्र बिलासपुर के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डा. एसपी सिंह ने किसानों से कहा कि वे केवल नत्रजन, फास्फोरस एवं पोटाश उर्वरकों का उपयोग ना करें बल्कि जैविक खाद एवं सूक्ष्म तत्वों का भी सही मात्रा में उपयोग करें जिससे मृदा उर्वरता और मृदा स्वास्थ्य बना रहेगा। संगोष्ठी में इसके अलावा के सचिव मृदा वैज्ञानिक डा. प्रमेंद्र कुमार केसरी शामिल थे।

इस अवसर पर खूबचंद बघेल सम्मान से सम्मानित प्रगतिशील जैविक कृषक श्रीकांत गोवर्धन एवं राघवेंद्र सिंह चंदेल ने भी वर्चुअल माध्यम से सभा को संबोधित किया। इस अवसर पर कृषि विज्ञानी डा.अजीत विलियम्स, सहायक प्राध्यापक डा. युष्मा साव,डा.आरके शुक्ला, एनके चौरे, डीके शर्मा, एसएल स्वामी, आरकेएस तोमर, संजय कुमार वर्मा, अजय टेगर, कर्मचारी एवं छात्र -छात्राएं उपस्थित थे।

Posted By: sandeep.yadav

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