बिलासपुर। Bilaspur News: झीरम घाटी हत्याकांड में राष्ट्रीय जांच एजेंसी(एनआइए) के बाद पुलिस द्वारा षड्यंत्र व हत्या का अपराध दर्ज करने के मामले को चुनौती देने वाली याचिका पर अंतिम सुनवाई चल रही है। एनआइए के साथ ही हस्तक्षेपकर्ता के अधिवक्ताओं की बहस पूरी हो गई है। अब सोमवार को इस मामले में राज्य शासन द्वारा जवाब के साथ ही आपराधिक प्रकरण पर तर्क प्रस्तुत किया जाएगा।

जस्टिस मनींद्र मोहन श्रीवास्तव व जस्टिस विमला सिंह कपूर की युगलपीठ में प्रकरण में अंतिम सुनवाई चल रही है। माना जा रहा है कि यह मामला अब निर्णायक दौर में है। सुप्रीम कोर्ट के एडिशनल सालिसिटर जनरल विक्रमजीत बनर्जी व हाई कोर्ट के असिस्टेंट सालिसिटर जनरल रमाकांत मिश्रा ने एनआइए की तरफ से बहस की और एनआइए एक्ट का हवाला देकर तर्क प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि एनआइए जिस मामले की जांच कर चुकी है, उस पर राज्य शासन को जांच करने का अधिकार नहीं है। अगर, जांच का कोई बिंदु है तो उस पर एनआइए के समक्ष रखा जा सकता है। उनकी बहस पूरी होने के बाद हस्तक्षेपकर्ता व पुलिस में आपराधिक प्रकरण दर्ज कराने वाले जितेंद्र मुदलियार की तरफ से अधिवक्ता सुदीप श्रीवास्तव व संदीप दुबे ने बहस की। जितेंद्र के पिता स्व. उदय मुदलियार झीरम घाटी में मारे गए थे। अधिवक्ताओं ने कोर्ट को बताया कि सामान्य रूप से अपराधों की जांच का अधिकार राज्य पुलिस को होता है। लेकिन एनआइए एक्ट इसका अपवाद है। अधिवक्ताओं ने कहा कि जगदलपुर स्थित एनआइए के विशेष कोर्ट को भी इस प्रकरण को स्थानांतरित करने का अधिकार नहीं है। जितेन्द्र मुदलियार की ओर से बहस पूरी होने के बाद अब सोमवार को राज्य शासन की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता आलोक बख्शी और उपमहाधिवक्ता मतीन सिद्दिकी तर्क रखेंगे।

Posted By: sandeep.yadav

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