बिलासपुर। राज्य शासन के निर्देश पर 21 नंवबर से पांच दिसंबर तक पुस्र्ष नसबंद पखवाड़ा चलाया जा रहा है। इसमंे सिर्फ खानापूर्ति की जा रही है। रोजाना चार से पांच नसंबदी कर अभियान को रोक दिया जा रहा है। जबकि हर दिन कम से कम 50 पुस्र्षों की नसबंदी करने का लक्ष्य दिया गया।

जनसंख्या नियंत्रण के लिए एक बार फिर से पुस्र्ष नसबंदी पर जोर दिया जा रहा है। नसबंदी कराने पर दो हजार स्र्पये प्रोत्साहन राशि भी दी जा रही है। नसबंदी कराने की जिम्मेदारी स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को दिया गया है। लेकिन नसबंदी को लेकर पुस्र्ष वर्ग स्र्चि नहीं ले रहे हैं। ऐसे में जो खुद से नसबंदी कराने पहुंच रहे हैं, उनका नाम नसबंदी अभियान में जोड़ कर खानापूर्ति की जा रही है। इसी वजह से स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार रोजाना महज चार से पांच पुस्र्षों की नसबंदी का आंकड़ा प्रस्तुत किया जा रहा है।

नसबंदी कांड की दहशत नहीं हुई दूर

2013 में हुए नसबंदी कांड की दहशत अब भी लोगों में बनी हुई है। सरकारी तौर पर महिलाओं की नसबंदी का आंकड़ा पूरी तरह से गिरा हुआ है। महिलाएं सरकारी अस्पतालों में नसबंदी कराने से बच रही हैं। वहीं अब इसका असर पुस्र्षों में भी नजर आ रहा है।

जैसे ही कोई स्वास्थ्य कार्यकर्ता लोगों से संपर्क कर रहा है और नसबंदी के लिए जागरूक करने की कोशिश कर रहा है। वैसे ही लोगों को नसबंदी कांड की याद आ जा रही है। ऐसे में लोग नसबंदी कराने से साफ मना कर दे रहे है।ं ऐसे में सिर्फ कागजों में नसबंदी पखवाड़ा चल रहा है।

Posted By: sandeep.yadav

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