बिलासपुर। Bilaspur News: देशव्यापी लाकडाउन के प्रथम चरण में जब चारों तरफ कोरोना का संक्रमण बढ़ रहा था,लोग घरों में कैद हो गए थे। डरे सहमे जिंदगी गुजारने मजबूर हो रहे थे। इसी दौर में लोगों में तेजी के साथ संक्रमण भी फैला। जिस मोहल्ले में संक्रमित की खबर मिलती थी एकाएक सन्नाटा पसर जाता था। संकट और संक्रमण के इस दौर में कोरोना वारियर्स ने साहस दिखाया और संक्रमितों को बचाने अपनी जान की बाजी भी लगा दी। कोविड-1-अस्पताल की नोडल अधिकारी डा.आरती पांडेय ऐसी ही कोरोना वारियर्स हैं जिन्होंेने संक्रमण के शुस्र्आती दिनाें से लेकर आजतलक साहस और ईमानदारी के साथ अपने काम को अंजाम दे रही हैं। एक दौर ऐसा भी आया था जब उनके स्वजन संक्रमित हो गए थे। संक्रमण के इस दौर में भी उन्होंने अपना फर्ज निभाया। तब उनकी भूमिका दोहरी थी। संक्रमित स्वजनों को मानसिक रूप से सबल करने के साथ ही स्वस्थ्य करना और अस्पताल में भर्ती संक्रमितों का समुचित इलाज कराना। दोनों भूमिका में वे सफल रहीं।

लाकडाउन के प्रथम चरण में ही जिला प्रशासन ने जिला अस्पताल को कोविड-19 अस्पताल में तब्दील कर दिया था। जितनी सहजता नाम है उतना ही भयावह तब यह सुनकर और देखकर लगता था। संक्रमण के भयावह दौर में लोग इस अस्पताल में जाना तो दूर देखने भी कतराते थे। भय का आलम ये कि जरूरी काम होने के बाद भी लोग अस्पताल के सामने वाली सड़क से जाने के बजाय रास्ता बदल दिया करते थे। ऐसी जगह पर दिन और रात काम करने की जिम्मेदारी डा.पांडेय ने अपने स्टाफ और स्वास्थ्य कर्मियों के साथ बखूबी उठाई। वे बताती है कि अस्पताल में संक्रमितों के बीच रहने और लगातार काम करने का खामियाजा स्वजनों को भुगतना पड़ा। कोरोना के चपेट में आए। तब एक बारिगी मन परेशान हुआ। दोतरफा भागीदारी निभानी पड़ी। घर में स्वजनों के स्वास्थ्य की चिंता तो अस्पताल में भर्ती संक्रमितों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ को लेकर कामकाज। संकल्प और दृढ़ इच्छा शक्ति के कारण सब-कुछ ठीक रहा। स्वजन जल्दी ठीक हो गए। तब राहत की सांस ली और एक बार फिर मुस्तैदी के साथ अपनी जिम्मेदारी निभाने जुट गईं। खास बात ये कि प्रथम चरण के लाकडाउन से लेकर अनलाक होने के बाद भी डा.पांडेय अपनी जिम्मेदारी कोविड-19 अस्पताल में बखूबी निभा रही हैं।

आरएसएस की सराहनीय भूमिका

लाकडाउन के दौर में स्थिति बेहद खराब थी तब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ(आरएसएस) ने बखूबी काम किया। संघ के स्वयंसेवकों ने ऐसे परिवार पर फोकस किया जहां वृद्ध माता पिता हैं और बेटा लाकडाउन के बाहर शहर से बाहर फंसा हुआ है और अपने स्वजनों के पास नहीं आ पा रहे हैं। ऐसे परिवार के संघ ने बेटे की भूमिका निभाई। वृद्ध माता पिता के पास पहुंचकर पूरी जानकारी हासिल की। बीमार हैं तो इलाज चल रहा है या नहीं। किस डाक्टर के पास इलाज चल रहा है। कौन सी दवा खा रहे हैं। दवाई है भी या नहीं। जिनको दवा की जरूरत थी उनको दवा पहुंचा रहे थे। खाद्यान्न् की व्यवस्था भी लगातार कर रहे थे। जिस परिवार को सहायता उपलब्ध करा रहे थे उनका मोबाइल नंबर लेकर सुबह और शाम बात भी कर रहे थे। आरएसएस ने हेल्प लाइन नंबर भी जारी कर दिया था।

Posted By: sandeep.yadav

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