बिलासपुर। ग्राम पंचायत महमंद में 14वें वित्त की राशि में भारी गड़बड़ी का मामला सामने आया है। पंचायत की समान्य सभा में 10 लाख स्र्पये की गड़बड़ी का मामला उठा था। जांच करने से पता चला कि 20 लाख स्र्पये का भ्रष्टाचार हुआ है। वहीं सरपंच और सचिव ने मिलकर चार लाख स्र्पये का काम कराया और फर्जी बिल जमा कर 24 लाख स्र्पये निकाल लिए। इस मामले की जांच करने जिला पंचायत के अधिकारी गांव पहुंचे। इस बीच सरपंच जांच टीम के सामने उपस्थित हुए, पर सचिव गायब रहे।

शिकायत है कि महमंद ग्राम पचायत में जनपद पंचायत के अधिकारियों की मिलीभगत से सचिव ने करीब दस लाख स्र्पये का भ्रष्टाचार किया हैं। इसकी जांच करने के लिए दो सदस्यीय टीम गांव पहुंची। लेकिन सचिव गंगेलाल निर्मलकर टीम के सामने नहीं पहुंचा। अधिकारियों ने निर्माण कार्य की समीक्षा की। लोगों ने बताया कि पंचायत के खाते से काम करवाने के एवज में लाखों स्र्पये निकाला। इसकी जानकारी किसी को नहीं है। कही भी ठीक से काम नहीं हुआ है।

इस मद में निकाले लाखों स्र्पये

ग्राम पंचायत महमंद के सचिव ने जनपद पंचायत क्षेत्र में करीब 24 लाख रुपये से अधिक खर्च किए जाने का दस्तावेज जमा किया है। दस्तावेज के अनुसार कोरोना काल के दौरान पंचायत क्षेत्र में 14 वें वित्त योजना से भोजन पर 3 लाख 47 हजार 64 रुपये खर्च हुए है। सरपंच की माने तो डेढ़ लाख रुपये से अधिक खर्च नहीं हुआ है। इसी तरह दस्तावेज में बताया गया कि टेंट में 1 लाख 50 हजार 900 रूपये खर्च हुए।

23 हजार 400 रूपये का मास्का वितरण किया गया। 1 लाख 67 हजार 300 रूपये का मोटर पम्प खरीदा गया है। हैंडपम्प मरम्मत पर 17 हजार रूपए खर्च हुए। पेयजल व्यवस्था पर 3 लाख 36 हजार और डीआर ट्रेडिंग पर 1लाख 17 हजार स्र्पये खर्च किए। शपथ ग्रहण समारोह पर 56 हजार खर्च आया है। सचिव ने 5 लाख 55 हजार 590 स्र्पये गली मरम्मत में खर्च होने का दावा किया। दोबारा मोटर पम्प खरीदने में 1 लाख 5 हजार, पेयजल व्यवस्था पर 49 हजार 300 की जानकारी दी।

Posted By: Yogeshwar Sharma

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