बिलासपुर। गुजरात व राजस्थान में मवेशियों पर हमला करने और बीमारी फैलाने के बाद लंपी स्किन डिजीज छत्तीसगढ़ पहुंच गया है। राज्य सरकार ने इसके लिए अलर्ट जारी कर दिया है। पशुओं में होने वाले संक्रामक बीमारी की आशंका को देखते हुए कलेक्टर सौरभ कुमार ने जिले के प्रमुख मवेशी बाजार पर आगामी आदेश तक रोक लगा दी है। आशंका जताई जा रही है कि लंपी स्किन डिजीज छत्तीसगढ़ में धमक हो गया है। पशुओं में बड़े पैमाने पर संक्रामक बीमारी का हमला हो सकता है।

कलेक्टर सौरभ कुमार ने रतनपुर, तखतपुर सहित जिले की सभी पशु बाजारों पर आगामी आदेश तक के लिए प्रतिबंध लगा दिया है। पशुओं की संक्रामक बीमारी लंपी स्किन डिजीज के फैलने की आशंका को ध्यान में रखते हुए कलेक्टर ने इस आशय के आदेश आज जारी किए हैं। जारी आदेश में कलेक्टर ने कहा है कि राजस्थान एवं गुजरात में पशुओं में संक्रामक बीमारी लंपी स्किन डिजीज फैल चुकी है। जहां से व्यापारियों के जरिए लाए गए बीमार पशुओं के संपर्क में आने पर जिले की अन्य पशु भी रोगग्रस्त हो सकते हैं। इसके साथ ही बीमारी की रोकथाम के लिए जिले में पशुओं के परिवहन, पशु मेला, प्रदर्शनी, खरीदी बिक्री एवं अन्य राज्यों से पशुओं को चराने के लिए लाए जाने के लिए अगले आदेश तक प्रतिबंध प्रभावशील कर दिया गया है।

ये हैं लक्षण

- गौवंश में फैलने वाला वाइरसजनित रोग है। इस बीमारी में गाय के पूरे शरीर पर गांठें हो जाती हैं। जो बाद में फूटकर घाव में बदल जाती है।

- तेज बुखार, नाक व मुंह से पानी का गिरना, भूख नहीं लगना व दूध में गिरावट आ जाती है।

- पशुओं में इस बीमारी का फैलाव 15-20 प्रतिशत तक है। घरेलू गौवंश में मृत्यु दर दो प्रतिशत है। कमजोर व निराश्रित गोवंश में मृत्यु दर पांच प्रतिशत है।

इससे फैलती है बीमारी

- फैलाव मक्खी व मच्छर के माध्यम से मुख्य रूप होता है।

- पशुओं की लार, दूषित चारा व पानी से भी फैलता है।

ये सावधानी बरतें

- पशुपालक अपने बीमार गोवंश को बाहर चराने के लिए ना भेजें।

- बीमार पशुओं को स्वस्थ पशुओं से अलग रखें।

- उपचार के लिए नजदीकी पशु चिकित्सालय से संपर्क करें।

- गोठान को साफ सुथरा रखें व दिन में कम से कम दो बार गोठानों की सफाई करें।

- गोठान में नियमित रूप से मक्खी व मच्छर रोधी दवा का छिड़काव करें व नीम की पत्तियों का धुआं करें।

- पशुओं में सामान्य लक्षण दिखाई देने पर दर्द एवं बुखार रोधी दवा अवश्य दें।

- पशुओं को फिटकरी या लाल दवा से दिन में दो बार नहलाएं।

- बीमार पशुओं को पौष्टिक आहार एवं पीने के लिए स्वच्छ पानी उपलब्ध कराएं।

बीमारी की स्थिति में ये कतई ना करें

- बीमार पशुओं को बाहर चरने ना जाने दें।

- बीमार पशु के संपर्क में आने पर स्वस्थ पशु के संपर्क में ना आएं व साबुन से हाथ धोएं।

- बीमारी में मृत पशुओं को खुले में ना फेंके।

- पशु में यह बीमारी आने पर नजदीकी पशु चिकित्सालय में इलाज कराएं।

Posted By: Abrak Akrosh

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