बिलासपुर(नईदुनिया प्रतिनिधि)। ट्रैक्टर खरीदने के लिए मुंगेली जिले के ग्राम तोताकांपा निवासी किसान तिलक राम कोसले ने पंजाब नेशनल बैंक बेरला शाखा से तीन लाख 80 हजार स्र्पये का ऋण लिया था। एकमुश्त समझौता योजना के तहत सात जून 2011 को पूरी राशि जमा करा दी थी। बैंक प्रबंधन ने किसान को एनओसी भी जारी कर दिया था। नौ साल बाद फिर बैंक ने ऋण वसूली के लिए किसान को नोटिस जारी कर दिया। परेशान किसान ने स्थायी लोक अदालत में आवेदन पेश किया।

मामले की सुनवाई के बाद स्थायी लोक अदालत ने बैंक की कार्रवाई को खारिज कर दिया है। स्थायी लोक अदालत ने बैंक प्रबंधन की कार्रवाई पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा है कि किसान द्वारा बैंक में जमा किए गए दस्तावेज के आधार पर किसान के खिलाफ कार्रवाई करने से संस्था का आचरण संदिग्ध हो जाता है।

स्थायी लोक अदालत ने बैंक प्रबंधन की गतिविधियों पर तल्ख टिप्पणी करते हुए अपने फैसले में लिखा है कि जब आवेदक किसान ने एकमुश्त समझौता योजना के तहत राशि जमा करा दी थी तब ऋण लेने के लिए जिन दस्तावेजों में बैंक ने किसान से हस्ताक्षर कराए थे उन दस्तावेजों को आधार बनाना अनुचित है। यह आचरण कतई उचित नहीं कहा जा सकता। मुंगेली जिले के ग्राम तोताकांपा निवासी तिलक राम कोसले ने स्थायी लोक अदालत में मामला दायर कर कहा है कि उसने पंजाब नेशनल बैंक की शाखा बेरला से कृषि प्रयोजन के लिए 14 दिसंबर 2004 को ट्रैक्टर खरीदने के लिए तीन लाख 80 रुपये का लोन लिया था।

एकमुश्त समझौता योजना के तहत उसने सात जून 2011 को ऋण की पूरी राशि बैंक में जमा करा दी थी। राशि जमा करने के बाद बैंक ने एनओसी भी जारी कर दिया है। ऋण की राशि जमा कराने के नौ वषर््ा बाद वर्ष 2020 में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण मंुगेली के जरिए पंजाब नेशनल बैंक ने नोटिस जारी करा दिया। प्राधिकरण की ओर से जारी नोटिस में ऋण की राशि जमा करने की चेतावनी दी गई थी।

बैंक ने अपने वकील के जरिए जवाब पेश किया कि किसान ने ट्रैक्टर ट्राली खरीदने के लिए ऋण स्वीकृत करने का उल्लेख करते हुए एकमुश्त समझौता की राशि एक लाख 75 हजार स्र्पये जमा की थी। मंडल कार्यालय से इस संबंध में अनुमति नहीं मिल पाई। बैंक ने बताया कि मुख्यालय से अनुमति मिलने की प्रत्याशा में किसान को एनओसी जारी कर दिया गया था। बैंक ने बताया कि समझौता मुख्यालय द्वारा स्वीकृत न करने की जानकारी हमने किसान को दे दी थी।

अदालत के फैसले का महत्वपूर्ण तथ्य

0 यदि वरिष्ठ कार्यालय द्वारा ऋण खाता समाप्त करने की स्वीकृति नहीं दी गई थी तो बैंक का यह दायित्व था कि वह सात जून 2011 के बाद आवेदक किसान को एक लाख 75 हजार रुपये वापस करते हुए सूचना देते कि उनका खाता बंद नहीं हुआ है।

0 शाखा प्रबंधक द्वारा ऋण खाता बंद किये जाने तथा पंजीयन अधिकारी को एनओसी जारी करने का तात्पर्य यह है कि उक्त स्थिति के बाद संपूर्ण जिम्मेदारी बैंक अथवा तत्कालीन शाखा प्रबंधक की मानी जाएगी।

0 दस्तावेजों के अनुसार यह स्पष्ट है कि आवेदक किसान ने लोन जमा कर दिया है। यह स्पष्ट है कि आवेदक के पास उसके ऋण खाते को बंद किये जाने संबंधी दस्तावेजी साक्ष्य मौजूद है।

0 अनावेदक संस्था द्वारा आवेदक के भूमि संबंधी दस्तावेजों के आधार पर वसूली के संबंध में की गई सामान्य अथवा राजस्व कार्रवाई समाप्त की जाती है।

Posted By: anil.kurrey

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