बिलासपुर। लॉक डाउन के दौरान दुकानें बंद हैं और लोगों को रोजमर्रा की जरूरत की चीजें भी मुश्किल से मिल रही हैं। स्वयंसेवी संस्था, पुलिस, नगर निगम और जिला प्रशासन किसी तरह लोगों को राशन सब्जी और अन्य जरूरी सामग्रियां पहुंचा रहे हैं, लेकिन नशा करने के आदी लोगों के लिए लॉक डाउन कड़ी परीक्षा साबित हो रहा है। इस दौरान पान दुकान और अन्य सभी तरह के नशीले सामग्रियों की दुकानें बंद होने से उन्हें यह चीजें नहीं मिल रही हैं। बुधवार को हेमू नगर इलाके में एक महिला गुड़ाखू बांटने निकली तो लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा।

संकट की इस घड़ी में लोग सब का ध्यान रख रहे हैं। राशन सब्जियों के अलावा बच्चों के लिए दूध और बिस्कुट पहुंचाया जा रहा है तो ऐसे में एक महिला को उनकी भी फिक्र हो गई जो गुड़ाखू के आदी हैं। गुड़ाखू का इस्तेमाल भले ही मंजन की तरह किया जाता है, लेकिन है यह नशे की वस्तु ही है। इसलिए जब हेमू नगर के खास इलाके में बेबी खान नाम की महिला अपने साथियों के साथ गुड़ाखू बांटने निकली तो यह खबर आग की तरह फैल गई और देखते ही देखते हैं यहां लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा।

बड़ी संख्या में महिलाएं गुड़ाखू पाने के लिए आपस में ही गुत्थमगुत्था होने लगी। एक तो गुड़ाखू जैसा नशीला पदार्थ बांटना, ऊपर से इस बहाने फिजिकल डिस्टेंसिंग नियम की धज्जियां उड़ाने की खबर जैसे ही तोरवा पुलिस को लगी। पुलिस मौके पर पहुंच गई, तो पाया कि महिला धारा 144 नियम को तोड़ते हुए बिना मास्क, सोशल डिस्टेंस का पालन किए लोगों को गुड़ाखू बांट रही है और लोगों में भी गुड़ाखू की ऐसी दीवानगी कि वे कोरोना और अपनी जान की फिक्र से बेपरवाह होकर गुड़ाखू की एक डिबिया पाने के प्रयास में किसी भी हद तक गुजरते दिखे।

एक तरफ सरकार कोरोना को रोकने का प्रयास कर रही है तो वहीं नशे के ऐसे गुलाम लोग सरकारी मेहनत को बर्बाद करने पर उतारू है। इसलिए पुलिस ने नियम की धज्जी उड़ाने वाली महिला को गिरफ्तार कर लिया जिसके पास से 12 पैकेट गुड़ाखू की डिबिया बरामद हुई है।

इस दौरान देशभर में दूध से लेकर फल-सब्जी, राशन और दवा तक बांटी जा रही है, लेकिन यह अपने आप में शायद अनोखा मामला था जहां कोई दानदाता गुड़ाखु बांटने निकला हो, लेकिन ऐसा करते हुए जब बेबी खान ने नियम तोड़ा तो उसे इसकी कीमत भी चुकानी पड़ी।

इस मामले में तोरवा पुलिस ने बेबी खान के साथ रानी यादव, मालती साहू, चंद्रिका जांगड़े, माया माधवानी, विमला यादव, शालिनी निषाद और कचरा बाई को गिरफ्तार किया है, लेकिन विडंबना देखिए कि कानून तोड़ने वाली महिलाओ के पक्ष में अचानक थाने में दो पूर्व पार्षद पहुंच गए और इन दोषी महिलाओं को छुडाने के लिए पुलिस पर ही राजनीतिक दबाव डालने लगे। अगर जनप्रतिनिधि ही नियम तोड़ने वालों के पक्ष में खड़े नजर आएंगे तो फिर नियम का पालन कैसे होगा। जातिगत राजनीति करने वालों को यह बात समझ में आनी चाहिए।

Posted By: Himanshu Sharma

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