बिलासपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि

खरसिया से कोरीछापर तक बिछाई 44 किमी की नई लाइन पर शनिवार को पहली बार मालगाड़ी दौड़ी। सुबह 7.05 बजे खरसिया स्टेशन से 58 वैगन की एक खाली मालगाड़ी कोरीछापर के लिए रवाना हुई और नौ बजे कोरीछापर स्टेशन पहुंची। यहां कोयला लोड होने के बाद दोपहर 13.40 बजे कुम्हारी स्टेशन के लिए छूटी।

दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे की यह महत्वपूर्ण ईस्ट रेल कॉरिडोर परियोजना है। इसके तहत खरसिया से गरे पेलमा समेत धरमजयगढ़ तक 102 किलोमीटर लंबी रेल लाइन का निर्माण प्रथम चरण में किया जाना है। अभी केवल 44 किमी तक लाइन का काम पूरा हुआ है। इस लाइन में मालगाड़ी के परिचालन के लिए अधिकारियों ने पिछले दिनों निरीक्षण किया। परीक्षण के दौरान लाइन ठीक थी। साथ ही मालगाड़ी चलाने के हरी झंडी दी गई। इसके बाद सुबह बिछाई गई इस नवनिर्मित लाइन में मालगाड़ी का परिचालन किया गया। पहला दिन होने के कारण रेल प्रशासन चिंतित था। यही वजह है कि परिचालन के दौरान मौके पर रेल मंडल के अधिकारी भी मौजूद थे। ट्रेन सुबह खरसिया से रवाना हुई और गंतव्य पर सुरक्षित पहुंची। कोयला लोड करने के बाद कुम्हारी के लिए रवाना हुई। सब कुछ ठीक होने के बाद अफसरों ने राहत की सांस ली। बता दें कि आगामी दिनों में इस लाइन का उपयोग कोचिंग ट्रेनों के लिए भी करना है। अभी से इसके लिए तैयारियां शुरू कर दी गई है। इन रेल लाइनों के निर्माण से न सिर्फ माल परिवहन को बढ़ावा मिलेगा बल्कि छत्तीसगढ़ के सुदूर एवं रेल विहीन क्षेत्रों के निवासियों को रेल आवागमन की सुविधा भी उपलब्ध हो सकेगी । साथ ही इन क्षेत्रों में आर्थिक व सामाजिक विकास को भी एक नई गति मिलेगी।

नौ स्टेशन बनाने की है योजना

इस परियोजना के अंतर्गत खरसिया से धरमजयगढ़ तक नौ स्टेशन बनाए जाएंगे। इनमें गुरदा, छाल, घरघोड़ा, कोरीछापर, कुरुमकेला, धरमजयगढ़, भालूमाड़ा एवं गरे पेलमा शामिल हैं। यह यात्रियों की सुविधा होगी। अभी से इस क्षेत्र के रहवासियों में लाइन गुजरने और ट्रेनों के स्टापेज व स्टेशन को लेकर उत्सुकता है।

अनुमानित लागत 3055 करोड़ रुपये

इस परियोजना के प्रथम चरण की वर्तमान अनुमानित लागत लगभग 3055 करोड़ रुपये है। इसमें एसईसीएल 64 प्रतिशत, इरकान 26 प्रतिशत व छत्तीसगढ़ शासन द्वारा 10 प्रतिशत की राशि संयुक्त रूप से साझा की जा रही है। दूसरे चरण के अंतर्गत धरमजयगढ़ से उरगा तक 62.5 किलोमीटर रेल लाइन का निर्माण किया जाएगा।