बिलासपुर। फर्जी रेल पास मामले में शुक्रवार से आरपीएफ ने जांच शुरू कर दी। पास लेकर पहुंचे शख्स की पहचान के लिए कैमरे का फुटेज खंगाला गया। वह कैमरे में कैद हुआ है पर उसका चेहरा स्पष्ट नजर नहीं आ रहा। मास्क व काला चश्मे के कारण चेहरा ढक गया है। शख्स 45 साल से ऊपर आयु का है और रंग सावला है। कद भी अधिक नहीं है। हालांकि आरपीएफ का कहना है कि फर्जीवाड़ा करने वाले को पकड़ने के लिए कई माध्यम है। वहां जल्द ही गिरफ्त में होगा।

बीते बुधवार को रेलवे स्टेशन स्थित आरक्षण केंद्र के काउंटर क्रमांक तीन पर एक व्यक्ति रेल यात्रा पास लेकर पहुंचा था। संदेह होने पर कर्मचारियों ने जांच की। पुष्टि के बाद जब उसे पकड़ने का प्रयास किया गया तो वह फरार हो चुका था। लेकिन इस पास से वह चार दिसंबर को टाटा से बिलासपुर तक सफर कर चुका है। इसे देखते हुए ही वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक पुलकित सिंघल ने रेलवे स्टेशन के सीआइ पार्थ पाठक को जांच के लिए प्रकरण आरपीएफ को सौंपने के लिए कहा।

सीआइ से आवेदन मिलने के बाद आरपीएफ ने फर्जीवाड़ा करने वाले शख्स को गिरफ्तार करने के लिए कमर कस ली है। इसी के तहत सबसे पहले फुटेज खंगाला गया। इसमें वह नजर आ रहा है पर चेहरे स्पष्ट नहीं है। करीब 10 मिनट तक वह आरक्षण केंद्र में था। इस दौरान उसने न मास्क हटाया और न चश्मा निकाला। इसलिए पहचान करने के लिए काफी जद्दोजहद करनी पड़ रही है।

अब उस शख्स की पहचान करने आरपीएफ प्रबल डाटा का सहारा लेगी। इसमें टाटा से बिलासपुर तक यात्रा का पूरा विवरण आ जाएगा। बशर्ते उसने यात्रा की हो। आरपीएफ को शंका है कि उसने रेलकर्मियों को गुमराह करने के लिए जानबूझकर पास में पिछली यात्रा की तारीख व जगह लिखी थी। ताकि आरक्षक केंद्र के कर्मचारी पास पर आसानी से भरोसा कर लें और जांच न करें। प्रबल डाटा से जांच दो दिन बाद हो पाएगी।

आपातकालीन स्थिति में ही कागज का पास मान्य

रेलवे कर्मचारियों के लिए पास से यात्रा करने की प्रक्रिया आनलाइन कर दी गई है। यह लागू हुए करीब एक साल हो गया है। वर्तमान में कागज का पास आरक्षण केंद्र में तभी मान्य होता है, जब आपातकालीन स्थिति हो। इसीलिए काउंटर में बैठे रेलकर्मी को पास हाथ में आते ही संदेह हो गया।

Posted By: sandeep.yadav

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