बिलासपुर। Bilaspur News : पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के दिशा-निर्देशों की खनिज विभाग के अफसरों को परवाह नहीं है। यही कारण है कि बारिश में भी रेत का अवैध उत्खनन बेधड़क जारी रहा। बिलासपुर से लेकर तखतपुर, कोटा और मस्तूरी ब्लाक में बहने वाली अरपा, शिवनाथ और खारुन नदियों से माफियाओं द्वारा रेत निकाली जा रही है। माफियाओं का उत्खनन क्षेत्र में दबदबा ऐसा कि प्रभावित ग्रामीण भी भयभीत रहते हैं।

अवैध उत्खनन का एक विभत्स रूप हर वर्ष बारिश के दौरान देखने को मिलता है। बारिश के मौसम में हर वर्ष अरपा एक मासूम की बलि ले लेती है। पर्यावरण एवं संरक्षण विभाग के निर्देशों पर गौर करें, तो 15 जून से 15 अक्टूबर तक रेत सहित गौण खनिजों के उत्खनन पर प्रतिबंध लगा रहता है। चार महीने न तो नदियों के किसी भी रेत घाट से उत्खनन की अनुमति विभाग द्वारा दी जाती है और न ही गौण खनिजों के खदानों से उत्खनन करने दिया जाता है।

नियमों और दिशा-निर्देशों की जानकारी विभागीय महकमे को न हो, ऐसा हो ही नहीं सकता। प्रतिवर्ष इस दिशा-निर्देश का पालन करने की अनिवार्यता केंद्र सरकार ने रख दी है। अचरज की बात ये है कि इस महत्वपूर्ण निर्देश का परिपालन जिले में नहीं हुआ। अरपा नदी में एक दर्जन से अधिक रेत घाटों का चिह्नांकन खनिज विभाग ने किया है। इन घाटों से उत्खनन की सशर्त अनुमति पर्यावरण विभाग ने भी दे दी है।

इसमें निर्देशों और शर्तों का पालन करना जरूरी है। शर्तों के उल्लंघन की स्थिति में कार्रवाई भी की जाएगी। कड़े नियमों के बाद भी ठेकेदारों के अलावा माफियाओं को इसकी परवाह ही नहीं है। पूरे बारिश के मौसम में घाटों से रेत की खोदाई अनवरत जारी रही। शिकायत करने के बाद भी जब खनिज विभाग ने रेत घाट से उत्खनन बंद नहीं कराया, तो मंगला के ग्रामीणों ने रेतघाट जाने वाली रास्ते की खोदाई कर दी थी।

एक्सीवेटर के जरिए दो फीट गहरा गड्ढा खोद दिया था। तब घाट में खोदाई बंद कर दी गई थी। मंगला के अलावा तुरकाडीह में भी कुछ इसी तरह का गोरखधंधा चल रहा था। रेत के अवैध उत्खनन के साथ ही माफिया और ठेकेदार उत्खनन के लिए बनाए गए मापदंडों का भी खुलकर उल्लंघन कर रहे हैं। आलम ये कि घाट ठेका लेने के बाद ठेकेदार मनमानी करने लगे हैं। पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के एक भी निर्देशों का जिले में पालन नहीं हो रहा है।

रेत निकालने के लिए डैम को खाली कर दिया

मस्तूरी ब्लाक के ग्राम जोंधरा में सिंचाई सहित अन्य सुविधाओं के लिए डैम बना हुआ है। इसके ऊपरी हिस्से में ग्राम भिलौनी स्थित है। खनिज विभाग ने यहां रेत घाट स्वीकृत कर दिया है। घाट से उत्खनन का ठेका भी दे दिया है। रेत की खोदाई के लिए माफियाओं से गर्मी के मौसम में डेम में डीजल पंप लगाकर पानी को खाली कर दिया था।

इसके बाद रेत निकालने लगे। डेम खाली होने के कारण जोंधरा, चिस्दा, परसोड़ी, भिलौनी और लोहर्सी सहित आस-पास के दर्जनों गांव में जल स्तर नीचे चला गया। जिसका खामियाजा आज भी ग्रामीणों को भुगतना पड़ रहा है।

Posted By: Shashank.bajpai

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