बिलासपुर। लगातार हो रही वर्षा के मद्देनजर रेलवे ने संवेदनशील क्षेत्रों में सतर्कता बढ़ा दी है। इंजीनियरिंग विभाग के कर्मचारी इन दिनों मानसून पैट्रोलिंग में लगे हुए हैं। मौके पर तैनात रहकर और पैदल घूम-घूमकर क्षेत्र में नजर बनाए हुए है। ट्रैक पर पड़ने नाले, नदी में जरा भी पानी खतरे के ऊपर होता है, तो तत्काल इसकी सूचना उच्चाधिकारियों को देनी है। जिससे की समय रहते सावधानी बरती जाए।

रेलवे में भी सुरक्षा के मद्देनजर मानसून पैट्रोलिंग का नियम है। इसकी शुरुआत मानसून की दस्तक के साथ हो गई थी। हालांकि बीच में मौसम साफ था और वर्षा नहीं हो रही थी। इसलिए पेट्रोलिग भी उतने सतर्कता से नहीं हो रही थी। पर बीते चार दिनों से जिस तरह मौसम का मिजाज बदला है और तेज वर्षा हो रही है। उसे देखते हुए रेल प्रशासन की चिंता बढ़ गई है। यही वजह कि मानसून पैट्रोलिंग में विशेष नजर रखी जा रही है। कर्मचारियों की रिपोर्टिंग भी हो रही है। पैट्रोलिंग उन जगहों पर की जा रही है जो संवेदनशील क्षेत्र हैं। जिन स्थानों में ट्रैक नदी- नालों के ऊपर है।

वर्षा के दौरान वहां पानी भर गया है। हालांकि अभी ट्रेनों के परिचालन बंद करने जैसी स्थिति नहीं है। पर यह स्थिति कब निर्मित हो जाए,यह कोई नहीं जानता है। खासकर कटनी सेक्शन के खोड़री, खोंगसरा, बेलगहना रेलवे स्टेशन के आसपास इसका खतरा ज्यादा रहता है। यहां नदी- नाले के अलावा पहाड़ या पेड़ ट्रैक पर गिरने की आशंका रहती है। पहले कई बार ऐसा हो चुका है। पैट्रोलिंग होने से कम से कम इस तरह की परेशानी आने पर कर्मचारियों की नजर पड़ जाती है और ट्रेनों के गुजरने से पहले ट्रैक सामान्य कर दिया जाता है या फिर ट्रेन को आगे की किसी स्टेशन में नियंत्रित कर दिया जाता है। अत्यधिक वर्षा होने पर ट्रैक के बहने का खतरा रहता है।

इसके साथ ही नदियों में बने रेलवे ब्रिज पर सतत निगरानी की जा रही है। इस स्थिति में यदि ट्रेनों का परिचालन होता है तो बड़ी दुर्घटना होने की आशंका रहती है। ऐसा न हो इसीलिए रेलवे अपने मैदानी अमले को मानसून पैट्रोलिंग के लिए सजगता बरतने के लिए निर्देश दिया है। 24 घंटे संवेदनशील क्षेत्रों में स्टाफ की तैनाती है। जगह - जगह तैनात स्टाफ व मोबाइल स्टाफ पूरे समय संवेदनशील क्षेत्रों पर नजर रख रहा है। इसके अलावा प्रतिदिन की स्थिति से अधिकारियों को अवगत भी कराया जाता है। इंजीनियरिंग विभाग के अलावा अन्य विभाग भी अपने- अपने स्तर पर सतर्कता बरतते हुए ठोस उपाय करने में जुटे हैं। संकेत व दूर संचार और इलेक्ट्रिक विभाग बिजली से संबंधित व्यवस्थाओं को व्यवस्थित करने में जुटे हैं तो ओएचई विभाग तार का मेंटेनेंस और इसमें बाधा पहुंचाने वाले वृक्षों की छंटाई का काम भी पूरा कर लिया है।

जोन के कुछ संवेदनशील सेक्शन

दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे जोन में कुछ सेक्षन बेहद संवेदनशील है। जिनमें रायगढ़- झारसुगुड़ा, रायगढ़ - कोरतलिया, ईब- झारसुगुड़ा, बिलासपुर- अनूपपुर,अनूपपुर - अंबिकापुर आदि। यहीं सतत निगरानी रखी जा रही है। जोन के तीनो मंडल में 92 संवेदनशील क्षेत्र हैं।

Posted By: Abrak Akrosh

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