बिलासपुर। युवक ने मकान को गिरवी रखकर फाइनेंस कंपनी से 58 लाख 87 हजार स्र्पये लोन लिया। किस्त के रूप में 14 लाख 57 हजार 586 स्र्पये जमा करने के बाद बंधक मकान बेच दिया। किस्त की राशि जमा नहीं होने पर फाइनेंस कंपनी के कर्मचारी मौके पर पहुंचे। तब धोखाधड़ी का पता चला है। आरोपित ने 44 लाख 20 हजार स्र्पये का गबन किया है। कंपनी के मैनेजर की शिकायत पर तारबाहर पुलिस ने धोखाधड़ी का अपराध दर्ज किया है।

तोरवा निवासी श्याम सुंदर उचनिया और समता उचनिया ने साल 2016 में चोला मंडलम इन्वेस्टमेंट एंड फाइनेंस कंपनी लिमिटेड में लोन लेने के लिए आवेदन दिया। लोन के एवज में तोरवा के विवेकानंद नगर वार्ड नंबर 40 स्थित मकान को बंधक रखा। कंपनी ने दोनों को 46 लाख स्र्पये लोन दिया। इसकी किस्त के रूप में प्रति माह 46 हजार 800 स्र्पये जमा करता था। उन्होंने कुल 14 लाख 57 हजार 586 स्र्पये जमा किए। पांच सितंबर 2019 के बाद कोई किस्त जमा नहीं हुई। उस पर कुल 44 लाख 20 हजार स्र्पये बकाया है।

ऐसे में फाइनेंस कंपनी कर्मचारी बंधक मकान को कुर्क करने मौके पर पहुंचे। तब पता चला कि श्याम सुंदर और समता ने फर्जी तरीके से सिटी कोतवाली जगमल चौक निवासी अपने रिश्तेदार शेखर राम यादव को मुख्तियार बनाकर बंधक मकान को बेच दिया है। मामले में कंपनी के कलेक्शन मैनेजर प्रकाश वर्मा की शिकायत पर पुलिस ने जुर्म दर्ज किया है।

लोन लेते ही शेखर को बनाया मुख्तियार

जांच में पता चला कि श्याम सुंदर और समता ने लोन के तत्काल बाद फर्जीवाड़ कर शेखर राम यादव को मुख्तियार घोषित कर दिया। इससे शेखर को मकान बेचने का अधिकार मिल गया। फिर शेखर के साथ मिलकर मकान को बेच दिया।

Posted By: Yogeshwar Sharma

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