बिलासपुर(नईदुनिया प्रतिनिधि)। छत्तीसगढ़ में एक और नक्सली मुठभेड़ सवालों के घेरे में आ गई है। अब बीजापुर के करका गांव में पुलिस फायरिंग में मारे गए युवक की मां ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। याचिका दायर कर कहा है कि बेटा गाय चराने के लिए गया था और पुलिस ने नक्सली समझकर उसे मार दिया। यह फर्जी एनकाउंटर है। सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब पेश करने को कहा था। मामले को अंतिम सुनवाई के लिए रखा गया है।

बीजापुर जिले के ग्राम करका में चार ग्रामीण छह जनवरी 2018 को गाय चराने जंगल गए थे। इस दौरान पुलिस ने उनके नक्सली होने का आरोप लगाकर फायरिंग शुरू कर दी। इसे कथित रूप से नक्सली मुठभेड़ बताया गया। इस दौरान पुलिस की फायरिंग से समारू मड़कम नाम के ग्रामीण की मौत हो गई। फायरिंग में एक अन्य ग्रामीण की पैर में गोली लगी।

जबकि दो ग्रामीण पुलिस के डर से भाग गए। जिसके पैर में गोली लगी और घायल हुआ उसे पुलिस ने छोड़ दिया और पुलिस ने समारू मड़कम को नक्सली घोषित कर दिया। गौरतलब है कि इसके पूर्व भी बस्तर पुलिस पर फर्जी मुठभेड़ का आरोप लग चुका है। मामला भी हाई कोर्ट में आया था। इसके बाद कोर्ट ने मामले की विस्तृत जांच का आदेश दिया था। मामले की जांच भी हुई। इस मामले में भी शासन से जवाब मांगा गया था।

दोषियों पर कार्रवाई और सीबीआइ जांच की मांग

समारू की मां ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर एनकाउंटर को फर्जी बताया है। याचिका में कहा है कि दोषियों के खिलाफ एफआइआर दर्ज कराई जाए। साथ ही घटना की सीबीआइ जांच कराने की भी मांग की गई है। याचिका में कहा गया है कि पुलिस-नक्सली मुठभेड़ हुई थी तो घायल ग्रामीण को बिना किसी कार्रवाई के कैसे छोड़ दिया गया।

Posted By: anil.kurrey

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