बिलासपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि

अब तक महापौर की दावेदारी करने वाले नेता अचानक से पार्षद चुनाव जीतने के लिए सुरक्षित सीट की तलाश में जुट गए हैं। ऐसा उस चर्चा के बाद शुरू हुआ जिसमें पार्षदों द्वारा महापौर चुनने की बात कही जा रही है। कुछ सीटों पर तो सगे रिश्तेदार आपने सामने आ गए हैं और एक -दूसरे का पत्ता काटने में लग गए हैं। सबसे ज्यादा मारामारी पुरानी निगम सीमा की 12 सामान्य सीटों पर है। इस पर हर वर्ग के उम्मीदवारों की नजर है।

शहर में महापौर पद सामान्य घोषित हो गया है। इसके कारण स्वभाविक रूप से यहां दावेदारों की फौज खड़ी हो गई है। कांग्रेस और भाजपा में कई बड़े नाम भी दावेदारों की सूची में शामिल हैं। इस बीच अचानक से खबर आई कि राज्य शासन ने तीन सदस्यीय हाईपावर कमेटी का गठन दिया है जो इस बात पर विचार करेगी कि महापौर का प्रत्यक्ष चुनाव होगा या पार्षद चुनेंगे। इस कमेटी के गठन के बाद माना जा रहा है कि अब पार्षदों के जरिए ही महापौर का चुनाव होगा। इसके बाद कल तक जो नेता महापौर के लिए दावेदारी कर रहे थे उन्होंने अपने लिए सुरक्षित सीट तलाशनी शुरू कर दी है। जिससे पुराने पार्षद और बड़े नेताओं के बीच जमकर जुबानी जंग चल रही है। दिनभर नेता फिर से वार्ड परिसीमन की लिस्ट देखकर अपने लिए सुरक्षित सीट तलाशते नजर आए। सुरक्षित सीट से लेकर अनारक्षित सीट तक नए-नए दावेदार सामने आ रहे हैं। सर्वाधिक मारामारी पुरानी निगम सीमा की 12 अनारक्षित सीटों पर है। जहां अचानक से नेताओं की भीड़ नजर आने लगी है। सबसे ज्यादा हलचल कांग्रेस में है। जहां नेतागीरी छोड़ चुके पुराने बड़े नेता भी अचानक से मैदान में आ गए हैं। जिसने माहौल में गर्मी पैदा कर दी है। शहर के दो वार्ड मुन्नूलाल शुक्ला और लालजपतराज नगर में मारामारी सर्वाधिक है। इसका कारण यह है कि इन दोनों ही वार्डों में कई बड़े नेता रहते हैं। इसके अलावा कुछ नेता वहां अपना पुराना मकान होने का हवाला देकर टिकट की दावेदारी कर रहे हैं। हालांकि वे अपना मकान बेच चुके हैं और मोहल्ला छोड़े भी दसों साल हो गए। पार्षद की दावेदारी के लिए उन्हें अपना पुराना मोहल्ला याद आने लगा है। इसी तरह कई नेता अपने रिश्तेदारों का वार्ड में दखल होने के नाम पर दावेदारी करने में जुटे हैं।

कौन बांटेगा टिकट, कांग्रेस में संकट

एक तरफ नेताओं ने संगठन में पार्षद पद के लिए अपनी ताल ठोंक दी है,लेकिन उनके सामने संकट यह है कि टिकट बांटेगा कौन। गुटबाजी वाली कांग्रेस में शहर का कौन सा हिस्सा किस बड़े नेता के कोटे में आएगा इसे लेकर भी संकट है। इधर कई दावेदारों को यह भी डर है कि कोई डायरेक्ट ऊपर से टिकट न आए। इस तरह भारी कशमश के बीच कौन सी सीट किस कांग्रेस नेता को मिलेगी यह तय नहीं है।

भाजपा में विधानसभावार दावेदारी

भाजपा में भी पार्षद पद के लिए जमकर गहमागहमी है,हालांकि कोई इसे सार्वजनिक नहीं कर रहा है। कहा जा रहा है कि वहां टिकट विधानसभावार बंटेगा। मतलब विधानसभा प्रत्याशी या विधायक ही अपने क्षेत्र के पार्षदों की टिकट को फाइनल करेंगे। दावेदार भी इसी हिसाब से नेताओं के पास दावेदारी कर रहे हैं। यहां ऊपर से टिकट लाने की संभावना नहीं के बराबर जताई जा रही है।