बिलासपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि

घनी आबादी के बीच मौजूद तालापारा तालाब सालों से लोगों के कचरा फेंकने की जगह बनी हुई थी। इससे पूरे तालाब के पानी में कचरा तैरता रहता था। रही सही कसर जलकुंभी ने पूरी कर दी। लोगों को इस तालाब में सालों हो गए थे पानी देखे हुए। नईदुनिया की पहल के बाद निगम प्रशासन ने चार जेसीबी और 45 कर्मचारियों के साथ इसे साफ करने का बीड़ा उठाया। भारी मशक्कत के बाद आखिरकार इस तालाब का 90 प्रतिशत हिस्सा साफ हो चुका है। इससे अब तालाब का पानी भी साफ दिखने लगा है। उत्साहित निगम के अधिकारी यहां पचरी आदि बनाकर इसे और व्यवस्थित करने की तैयारी में हैं।

नईदुनिया ने तालाब संरक्षण के लिए अभियान चलाया है।इसमें शहर के अंदर मौजूद विभिन्न तालाबों की दुर्दशा को लेकर खबर प्रकाशित की गई और जिम्मेदार लोगों तक हालात की जानकारी पहुंचाई थी। इस अभियान का असर यह हुआ कि सालों तक उपेक्षित तालापारा तालाब को साफ करने का अभियान शुरू हुआ। इस बार निगम ने ठोस योजना के साथ काम किया और तालाब सफाई के लिए मछुआरों की विशेषज्ञ टीम को बुलाया गया। उनकी मदद के लिए जेसीबी भी लगाई गई। ताकि, कचरे को जल्दी तालाब से बाहर निकाला जा सके। यहां से डेढ़ सौ डंपर कचरा अब तक निगम प्रशासन निकाल चुका है। अब तालाब का पानी नजर आने लगा है। सालों से इस तालाब के पानी को जलकुंभी और कचरे ने ढंक रखा था। तालाब में तैरते कचरे को जैसे ही निकाला गया ,वैसे ही पानी दिखने लगा है। तालाब को इतना साफ देख अब निगम प्रशासन यहां एक बड़े हिस्से में पचरी निर्माण करने की तैयारी में है। ताकी लोग पानी में कचरा न डाल सकें और तालाब साफ-सुथरा नजर आए। पचरी से घिरा होने के कारण तालाब को आगे भी संरक्षित करने में मदद मिलेगी।

तैरते कचरे को खींचने लगी कर्मचारियों की फौज

सबसे पहले तालापारा तालाब के एक हिस्से को साफ करके तैरती जलकुंभी और कचरे को निकाला गया। इसके बाद बाकी कचरा तालाब के बीच और दूसरे छोर पर तैर रहे थे। तालाब के चारों ओर घनी आबादी होने से सभी ओर जाकर कचरा साफ करना संभव नहीं था। ऐसे में कचरे को तालाब के अंदर जाकर पहले अलग-अलग हिस्सों में किया गया। इसके बाद हर हिस्से को डोर और मछली पकड़ने के जाल से बांधकर वहां तक खींचकर लाया गया, जहां से सफाई के बाद कचरे और जलकुंभी आदि का परिवहन आसानी से हो सकता था। इस काम के लिए मछुआरों को मजदूरों की अच्छी खासी फौज लगानी पड़ रही थी। जो बड़ी मेहनत से तैरते जलकुंभी आदि को किनारे तक लाते थे। किनारे तक पहुंचने के बाद ही उसे बाहर निकालकर बाहर फेंका गया।

स्मार्ट सिटी के फंड से कायाकल्प

स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट ने भी अब तालापारा तालाब को अपनी विकास योजना में शामिल कर लिया है। यहां बोटिंग, सौंदर्यीकरण आदि कार्य अब स्मार्ट सिटी फंड से होगा। इसके अलावा यहां सफाई भी वे लगातार कराते रहेंगे, जिससे गंदगी और प्रदूषण की समस्या से मुक्ति मिल सके। स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट अब इसके लिए अलग से कार्ययोजना तैयार करेगा। इसके लिए वे अपने कंसलटेंट की मदद लेंगे।

नईदुनिया ने पूर्व में भी चलाया था अभियान

तालापारा तालाब में नईदुनिया ने पूर्व में भी जनसहयोग से सफाई अभियान चलाया था। इसमें स्थानीय लोगों के अलावा जनप्रतिनिधियों ने भी स्वप्रेरणा से आकर श्रमदान किया था। इसके बाद अब फिर नईदुनिया ने मुद्दा उठाया तो निगम प्रशासन सामने आया है। उनके द्वारा अब यहां वृहद सफाई अभियान चलाया जा रहा है। इजसमें अब तक पांच लाख रुपये खर्च हो चुके हैं।

गांव-गांव से लाए मजदूर

तालाब सफाई का काम आमतौर पर शहरी मजदूर नहीं कर पाते। स्थानीय मजदूरों के कीचड़, दलदल में उतरने से इन्कार करने के बाद निगम के इंजीनियरों ने अपने ठेकेदारों की मदद से गांव-गांव से मछुआरों को खोजकर निकाला। उनका काम तालाब और नदी में मछली पकड़ना होता है। उन्हें तालापारा तालाब के अंदर जाकर सफाई करने में कोई परहेज नहीं था। इन मजदूरों को कलेक्टर दर पर भुगतान करके तालाब की सफाई शुरू कराई गई। कचरे के परिवहन के लिए निगम के वाहन लगाए गए। इससे कम लागत में बड़ा काम हो गया। इस कार्य से उत्साहित निगम प्रशासन अब शहर के अन्य तालाबों में भी इसी तरह सफाई अभियान चलाने की तैयारी में जुट गया है।

तालापारा तालाब की सफाई बहुत चुनौतीपूर्ण काम था, क्योंकि यहां कचरा और जलकुंभी बहुत भरा हुआ था। इसके अलावा दिक्कत यह थी कि स्थानीय मजदूर इस काम को करने के लिए तैयार नहीं थे। हमें पूरे जिले से मछुआरों को खोजकर उन्हें सफाई के लिए तैयार करना पड़ा। इसके बाद कहीं जाकर ऐसा परिणाम आया है।

सरेश शर्मा

सहायक अभियंता, नगर निगम

तालाब की सफाई एक बड़ा काम है,जो अब अपने अंतिम चरण में है। इसके बाद यहां पचरी आदि का निर्माण करके और सफाई कराई जाएगी। अगर तालाब के चारों तरफ साफ-सुथरा हो तो यहां लोग फिर गंदगी करने से परहेज करेंगे।

पीके पंचायती

कार्यपालन अभियंता, नगर निगम

तालाब जलकुंभी और तैरते कचरे से पटा हुआ था। इससे तालाब का पानी भी नहीं दिखता था। नईदुनिया के अभियान चलाने से अब यहां का कचरा निगम प्रशासन ने साफ किया और यहां विशाल तालाब नजर आने लगा है। इससे पहले तालाब को केवल मोहल्ले के बुजुर्गों ने ही इतना साफ देखा है। लोगों को भी हम जागरूक कर रहे हैं कि वे आगे तालाब को साफ रखें।

रमाशंकर बघेल

पार्षद

Posted By: Nai Dunia News Network