बिलासपुर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। नईदुनिया गुरुकुल में प्रकाशित इंटरनेट मीडिया पर बहस विषय पर प्रकाशित कहानी को शासकीय उच्चतर माध्यमिक शाला कोनी और पासीद के विद्यार्थियों ने सुनी। विद्यार्थियों ने कहानी सुनने के बाद अपना अनुभव साझा करते हुए कहा कि इंटरनेट मीडिया आज एक अत्यंत अनिवार्य प्लेटफार्म बन गया है। जहां हम अपनी हर बात बिना किसी संकोच के रखते हैं। खुशी हो दुख हर चीज को शामिल करना चाहते हैं। कई बार बहस भी होता है। यह एक ऐसा मंच है जिसमें कोई लगाम नहीं है। तभी तो कई बार पोस्ट करने वालों को अपमानित भी होना पड़ता है। इंटरनेट मीडिया में अनुशासन जरूरी है नहीं तो इसके दुष्परिणाम दिखने लगता है।

नईदुनिया गुरुकुल शिक्षा से संपूर्णता के अंतर्गत प्रकाशित कहानी को नईदुनिया के सदस्यों ने शुक्रवार को दो प्रमुख स्कूलों में सुनाया। इसे सुनने के बाद विद्यार्थियों ने अपना अनुभव भी साझा किया। सबसे पहले शासकीय उच्चतर माध्यमिक शाला कोनी में दोपहर 12 बजे कहानी सुनाई गई। इस दौरान प्राचार्य डा.अर्चना शर्मा उपस्थित रहीं। बच्चों को कहानी सुनाते हुए बताया गया कि समय के साथ समाज में मंच भी बदल रहा है। पहले के लोग चौपाल, पंचायत, रेडियो, टेलीविजन किसी दौर में थे, आज इंटरनेट मीडिया इसका बड़ा मंच है। यह ऐसा मंच है जिस पर लोगों को जोड़ना अपेक्षाकृत बहुत सरल है। किसी भी देश दुनिया से लोग आसानी से जुड़ जाते हैं। ऐसे में अनुशासन अहम हो जाता है। उचित-अनुचित का भेद करना होगा। वास्तव में यह आत्मानुशासन होगा। बिना सीमाओं के हम सब अराजक हो सकते हैं। इससे हमारी ऊर्जा व्यर्थ जाएगी। इसके दुष्परिणाम भी निकल सकते हैं।

पासीद स्कूल के बच्चों ने सुनी कहानी

शासकीय उच्चतर माध्यमिक शाला पासीद में कहानी सुनाते हुए उन्हें बताया गया कि भावनात्मक बुद्धि या इमोशनल इंटेलिजेंस का महत्व काफी ज्यादा है। इंटरनेट मीडिया पर बहस के अनुशासन का एक यह भी पक्ष है कि जो लोग इसमें शामिल नहीं हैं, उनका भी ध्यान रखें। यदि हम अपनी भाषा तथा वाणी के प्रति सचेत नहीं हैं तथा बहस के दौरान संतुलित एवं परिपक्व व्यवहार प्रदर्शित नहीं कर रहे हैं तो नकारात्मक असर पड़ता है।

शांत रहने की आदत बनानी चाहिए

बच्चों को हमेशा कोई भी बात शांति और धैर्य के साथ सुनना चाहिए। कई बार देखा जाता है कि बहुत ही सतही और सामान्य विषयों पर चर्चा होती है। इससे बचना चाहिए। हमें विषय की गंभीरता, उपयोगिता और प्रासंगिकता का ध्यान भी रखना चाहिए। जिसकी जानकारी नहीं हो, उस पर वक्ता न बनें तो ही अच्छा है। श्रोता बने रह सकते हैं। केवल लोकप्रियता ही गुणवत्ता का मानक नहीं है। कहानी में नंदिनी का व्यवहार एकदम गलत था।

Posted By: Abrak Akrosh

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