बिलासपुर(नईदुनिया प्रतिनिधि)। आजकल अधिकांश लोग हर छोटी-बड़ी चीज के लिए इंटरनेट का सहारा लेते हैं। कोई गूगल से सलाह मांगता है तो कोई यूट्यूब पर बीमारी का इलाज ढ़ूंढता है। फेसबुक, इंस्टाग्राम हो या टि्वटर हर साइट पर सलाहकारों की भीड़ रहती है। चयन में यदि जरा सी चूक हुई तो इसका बड़ा खमियाजा भुगतना पड़ता है। हर जानकारी सही मिलेगी इसकी कोई गारंटी नहीं होती। यह बातें शासकीय बालमुकुंद हायर सेकेंडी स्कूल की प्राचार्य निशा क्षत्रीय ने गुरुकुल की कहानी पढ़ने के बाद कही।

नईदुनिया गुरुकुल डिजीटल संस्कार के अंतर्गत प्रकाशित सलाह और सलाहकारों के चयन में सावधानी विषय पर आधारित कहानी को पढ़ने के बाद प्राचार्य निशा ने आगे यह भी कहा कि भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग अपनो से ज्यादा इंटरनेट को अपना समझने लगे हैं यही कारण है कि पड़ोस में चिकित्सक उपलब्ध होने के बाद भी यूट्यूब पर सर्च कर अपनी बीमारी का इलाज ढूंढते हैं। अच्छी सेहत बनाने या फिर कोचिंग बातचीत व्यवहार के तरीके भी यहीं से ग्रहण करते हैं। जिसका कारण अक्सर लोग धोखा खा जाते हैं। कहानी में जब आश्ाीष को दीपू के बारे में पता चला तो उसके होश्ा उड़ गए। दीपू यूट्यूब पर सेहत बनाने और अपना वजन कम करने खाना-पीना कम कर दिया था। जिसके कारण उसके शरीर में कमजोरी आ गई। स्कूल में बेहोश होकर गिर गया। अस्पताल पहुंचा तो इसका अहसास हुआ कि उसने बहुत बड़ी गलती कर दी। बिना विशेषज्ञों के सलाह के डाइट चार्ट कभी फालो नहीं करना चाहिए। सेहत पर इसका तगड़ा नुकसान होता है।

लेखिका क्षमा शर्मा की कहानी खास

प्राचार्य निशा ने यह भी कहा कि वह नईदुनिया गुरुकुल में प्रकाशित कहानियों को बहुत ही ध्यान से पढ़ती हैं। लेखिका क्षमा शर्मा द्वारा लिखित कहानी समाज को जगाने वाली होती है। उनका लेख सिर्फ बच्चों तक सीमित नहीं रहता बल्कि बड़ों के लिए भी अत्यंत उपयोगी सिद्ध होता है। वर्तमान समय में जिस तेज गति से बच्चे और नौजवान इंटरनेट का इस्तेमाल कर रहे हैं उससे कहीं ज्यादा घरेलु महिलाएं और पुरुष सर्च करते हैं।

सर्च करते समय बरतें सावधानी

इंटरनेट मीडिया में कोई भी सलाह या जानकारी प्राप्त करने से पूर्व सावधानी बरतनी चाहिए। सदैव यह प्रयास होना चाहिए कि संबंधित साइट या एप वैध होने के साथ वह कितना सार्थक है। विषय विशेषज्ञों से सलाह लेनी चाहिए। बिना सोचे समझे कोई भी प्रोडक्ट, सलाह या कोई सामान नहीं लेना चाहिए। आयुर्वेद या दवाओं के नाम पर लोगों को बेवकूफ बनाया जाता है, जिसका असर सेहत पर पड़ता है।

Posted By: Abrak Akrosh

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