बिलासपुर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। नईदुनिया गुरुकुल शिक्षा से संपूर्णता के अंतर्गत इंटरनेट मीडिया पर बहस के संस्कार विषय पर प्रकाशित कहानी पढ़ने के बाद शासकीय उच्चतर माध्यमिक शाला पंधी के प्राचार्य संजय शर्मा ने अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा कि इस सप्ताह प्रकाशित कहानी समाज के लिए प्रेरणादायक है। बच्चों को इससे सीख लेने की जरूरत है। जिंदगी में कभी किसी के मजाक उड़ाने का बिल्कुल बुरा नहीं मानना चाहिए। बल्कि उससे सबक लेकर आगे बढ़ना चाहिए।

प्राचार्य संजय शर्मा ने आगे कहा कि नईदुनिया गुरुकुल शिक्षा से संपूर्णता की कहानी बच्चों में संस्कार का बीज बोने का काम कर रहा है। आधुनिक व चकाचौंध भरी जिंदगी में एक ओर हमें तेजी से विकास की ओर अग्रसर हैं तो वहीं हम अपने मूल संस्कारों को भूलते जा रहे हैं। नईदुनिया परिवार ने एक अखबार के साथ बच्चों व समाज को जगाने का बीड़ा उठाया है। यह एक सराहनीय प्रयास है। विगत तीन वर्षों से मैं गुरुकुल की कहानियों को निरंतर पढ़ रहा हूं। स्कूल में बच्चों को भी कहानी सुनाते हैं। समाज के सभी वर्ग के लोगों को इसके लिए प्रयास करना चाहिए कि वे अपने घर या आसपास के बच्चों को कहानी सुनाएं। इसके बाद निश्चित रूप से देश व समाज में बदलाव दिखेगा। लेखिका क्षमा शर्मा द्वारा लिखित यह कहानी मुझे बहुत पसंद आई।

कहानी में स्कूल की एक भाषण प्रतियोगिता का जिक्र करते हुए पक्ष एवं विपक्ष में बोलने वाली दो छात्राएं राखी और प्रिया की जब अपना संवाद पूरा करती हैं तो इसी बीच राखी की एक अन्य छात्रा नंदिनी से पूर्व में विवाद था। इसके बाद नंदिनी ने राखी का खूब मजाक और उपहास उड़ाया। इससे राखी परेशान हो गई। तभी उसके पापा ने राखी को समझाया कि आपसी बातचीत में, किसी डिबेट में कभी नाराज नहीं होना चाहिए। तुम अपने विचार रखना चाहती थीं, नहीं रख पाईं तो कोई बात नहीं।

किसी के मजाक उड़ाने का तो कतई बुरा नहीं मानना चाहिए, बल्कि सबक लेकर आगे बढ़ना चाहिए। विजेता की घोषणा में समय था। राखी ने अपने मोबाइल पर फेसबुक खोला तो देखा वहां भी उसका मजाक उड़ाया जा रहा था। वह और परेशान हो गई। उसे लगने लगा कि उसने कोई बड़ी गलती कर दी। उसकी दादी इस बात को भांप गईं और बहुत प्रेम से कहा कि बेटा, यह आभासी दुनिया है, उसे उसी तरह से लो और ज्ञान की बातें बहुत ध्यान से अपने अध्ययन और बड़ों को सुनकर सीखो।

बच्चों के लिए मील का पत्थर

प्राचार्य संजय ने कहा कि इंटरनेट मीडिया पर बहस के संस्कार विषय पर प्रकाशित कहानी बच्चों के लिए मील का पत्थर साबित होगा। स्कूल में भाषण हो या कहीं वाद-विवाद। हमें अपनी बात मंच पर रखने के बाद शांत हो जाना चाहिए। कौन क्या बोल रहा है क्यों बोल रहा। इस बात पर ध्यान देने की बजाए आगे बढ़ने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। इंटरनेट कोई बहस की चीज नहीं है। हमें अपनी जिम्मेदारी का अहसास होना चाहिए।

Posted By: Abrak Akrosh

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