बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट की विशेष युगल बेंच में भाजपा शासनकाल में नागरिक आपूर्ति निगम(नान) में हुए करोड़ों के राशन घोटाला की सुनवाई हुई। याचिकाकर्ता ने अदालत से कहा कि उन्हें एंटी कॅरप्शन ब्यूरो द्वारा पेश चालान से कोई आपत्ति नहीं है। मामले में प्रस्तुत दस्तावेज में जिस सीएम मैडम और डॉक्टर साहब का उल्लेख है, उस संबंध में गिरीश शर्मा व शिवशंकर भट्ट से पूछताछ नहीं हुई है। दोनों व्यक्ति कौन हैं, इसकी जांच होनी चाहिए। बहस पूरी नहीं होने पर कोर्ट ने मामले को सात नवंबर को रखने का आदेश दिया है।

नान घोटाला मामले में हमर संगवारी व प्रदेश भाजपा अध्यक्ष विक्रम उसेंडी की याचिका में बहस होने के बाद शुक्रवार को याचिकाकर्ता सुदीप श्रीवास्तव की याचिका पर सुनवाई शुरू हुई। इस दौरान याचिकाकर्ता सुदीप श्रीवास्तव ने प्रदेश भाजपा अध्यक्ष द्वारा याचिकाकर्ता पर कांग्रेस सरकार से मिले होने के लगाए गए आरोप पर जवाब पेश किया।

उन्होंने पूर्व में कांग्रेस सरकार के निर्णय का विरोध करने के संबंध में जानकारी दी। साथ ही बताया वे किसी भी राजनीतिक दल के बंधन में नहीं हैं। इसके अलावा मामले में पिछली सभी बातों को रखते हुए कहा कि एसीबी द्वारा पेश चालान सही है। इस चालान में जो दस्तावेज पेश किया गया, इसकी पूरी जांच नहीं की गई। एसीबी ने जिनके खिलाफ चालान पेश किया है उन्हें सजा दिलाना चाहती है, किन्तु अन्य को बचाने में लगी है।

एसीबी ने शिवशंकर भट्ट व गिरीश श्ार्मा से जो दस्तावेज जब्त किया है, उसमें सीएम मैडम व डॉक्टर साहब का उल्लेख है। इन दोनों को डेढ़ हजार से तीन लाख रुपये तक का भुगतान किया गया। सीएम मैडम व डॉक्टर साहब कौन हैं, इस संबंध में एसीबी ने कोई पूछताछ नहीं की है। इसकी जांच होनी चाहिए।

इसके अलावा एसीबी ने चालान में कहा है कि एक जनवरी 2015 को नान में गड़बड़ी होने की गुप्त सूचना मिली थी। 12 फरवरी 2015 को एसीबी ने छापामार कार्रवाई की। इसमें प्रदेश के सभी 27 जिलों में गड़बड़ी हुई। फिर भी एसीबी ने छह-सात जिलों के कुछ ही अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की है। 2014-2015 की शिकायत की जांच की गई, जबकि गड़बड़ी 2011-2012 से चल रही थी। इसकी पूरी जांच होनी चाहिए।

Posted By: Hemant Upadhyay