बिलासपुर(नईदुनिया प्रतिनिधि)। सिकल सेल के मरीजों की जांच और उपचार के लिए 30 अक्टूबर को राज्य सरकार की ओर से सिकल सेल प्रबंधन इकाई की स्थापना जिला अस्पताल में की गई है। एक माह भी नहीं बीता है और अस्पताल प्रबंधन की उदासीनता और लापरवाही सामने आ रही है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग के संचालक ने सिविल सर्जन डा. अनिल गुप्ता को नोटिस थमाकर तीन दिनों के भीतर जवाब मांगा है। इससे अस्पताल में हड़कंप मचा हुआ है।

राज्य सरकार और स्वास्थ्य विभाग के ड्रीम प्रोजेक्ट सिकल सेल प्रबंधन योजना में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी और डाक्टर ही स्र्चि नहीं दिखा रहे हैं। इसे लेकर जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डा. अनिल गुप्ता को छत्तीसगढ़ स्वास्थ्य सेवाएं के संचालक ने कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। दरअसल 30 अक्टूबर को मुख्यमंत्री द्वारा राज्य के सभी जिला अस्पतालों में सिकल सेल प्रबंधन इकाई की शुरूआत की गई थी। जिला अस्पताल के सिविल सर्जन इसे लेकर गंभीर नहीं हैं। यही कारण है कि लापरवाही बरते मरीजों की आनलाइन एंट्री दर्ज नहीं की और साथ ही वाट्सएप ग्रुप के माध्यम से संचालक को भी जानकारी देना जरूरी नहीं समझा। इससे नाराज संचालक ने सिविल सर्जन को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया है।

पहले भी मिल चुका है नोटिस

यह पहली बार नहीं है जब डा. अनिल गुप्ता को लापरवाही के लिए नोटिस मिला हो। इससे पहले तत्कालीन सीएमएचओ डा. प्रमोद महाजन ने उन्हें ड्यूटी से अनुपस्थित पाकर नोटिस जारी किया था।

दिनभर करनी थी जांच, दोपहर एक बजे तक मिली सुविधा

ब्लड की जांच के लिए सैंपल लेने के लिए कोताही बरती जाती है। स्टाफ और लैब टेक्नीशियन के द्वारा दिन में महज एक बजे तक ही सैंपल लिया जाता है। जबकि सिकल सेल के मरीजों ब्लड की जांच दिन में किसी भी समय करने के निर्देश हैं।

क्या कहते हैं अधिकारी

सरकार की फ्लैगशिप योजनाओं को लेकर जिला स्तर के अधिकारी गंभीर हैं। ऐसे में किसी तरह की लापरवाही या अनदेखी करना डाक्टर और अधिकारियों को भारी पड़ सकता है। इस विषय में कार्रवाई की जानी चाहिए।

प्रमोद महाजन

जेडी, स्वास्थ्य विभाग

हमें पत्र मिला है। सिविल सर्जन को नोटिस जारी कर जवाब मांगा जाएगा। जवाब संतोषजनक नहीं होने पर कार्रवाई की अनुशंसा की जाएगी।

डा. अनिल श्रीवास्तव

सीएमएचओ, स्वास्थ्य विभाग

Posted By: Abrak Akrosh

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