बिलासपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि

नए गरीबी रेखा वाले राशन कार्ड को लेकर समस्या कम होने का नाम नहीं ले रही है। एकल नाम वाले कार्ड के अलावा अब नई दिक्कत यह है कि कई हितग्राहियों द्वारा सत्यापन के लिए सारे दस्तावेज जमा करने के बाद भी उनका कार्ड नहीं बना है। कुछ पर अधिकारी इतने मेहरबान हुए हैं कि उनके तीन-तीन कार्ड बना दिए गए हैं। कई का नाम तो कुछ का मोहल्ला भी बदल दिया गया है। इससे हितग्राही के कार्ड नहीं मिल पा रहे हैं। नगरीय निकाय चुनाव सिर पर होने से इन गलतियों को लेकर जमकर हंगामा हो रहा है।

अब तक गरीबी रेखा के कार्ड में केवल मुखिया का नाम होने की शिकायत थी। बाकी सदस्यों को छोड़ दिया गया था,जिसके कारण हितग्राहियों के राशन का कोटा घट गया। इसे लेकर मचे बवाल के बाद अब एक-एककर कई नए मामले भी सामने आने लगे हैं। कई हितग्राही जो अब तक राशन कार्ड मिलने की उम्मीद लगाए हुए थे,उन्होंने जब पतासाजी की तो पता चला कि उनके नाम का ऑनलाइन कोई कार्ड जनरेट ही नहीं हुआ है। जबकि पिछले माह तक उन्हें पुराने कार्ड से राशन भी मिलता रहा है और सत्यापन के लिए उन्होंने अपना कार्ड और पूरा विवरण भी जमा कर रखा है। अधिकारियों की लापरवाही के कारण उनका नाम ही छूट गया। ऐसे में छूटे हुए नाम के कारण हितग्राहियों की संख्या कम होनी थी। इस कमी की भरपाई उन्होंने एक व्यक्ति के नाम से कई कार्ड बनाकर कर दिया है। मतलब नाम में थोड़ा बहुत बदलाव कर एक व्यक्ति का ही दो से तीन राशन कार्ड बन गया है। छूटे हुए नाम को जोड़ने के साथ ही ऐसे नाम की तलाश में भी खाद्य विभाग जुट गया है,जिनके पास एक से अधिक राशन कार्ड है। किसी की उम्र को गलत लिख देना, नाम में गलती, जाति में गड़बड़ी, सदस्यों के नाम को गलत लिखना जैसी गलती तो आम बात है। इसी तरह कई हितग्राहियों का वार्ड बदल दिया गया है। इसके कारण उन्हें अपना राशन कार्ड नहीं मिल रहा है। अब राशन कार्ड खोजने के लिए हितग्राहियों को सरकारी कार्यालयों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।

नेताओं को मिला मौका

नगरीय निकाय चुनाव जल्द होना है। ऐसे में जो पार्षद पद के दावेदार हैं उन्होंने राशन कार्ड वाले मुद्दे को तुरंत ही पकड़ लिया है। अब वे हितग्राहियों से मिलकर उनका कार्ड सुधरवाने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा रहे हैं। कई ने दर्जनों की संख्या में त्रुटि सुधार वाले फार्म भी छपवा चुके हैं। अब डाटा एंट्री ऑपरेटरों से लेनदेन करके वे राशन कार्ड सुधरवाने के एक सूत्रीय काम में लग गए हैं। उन्हें उम्मीद है कि अगर इस काम को करा लिए तो उन्हें चुनाव में इसका लाभ मिल सकता है। इससे सरकारी कार्यालयों में आम लोगों के अलावा सभी पार्टी के पार्षदों की भी धमक बढ़ गई है।

एक नाम वाले कार्ड से मच चुका है बवाल

शहर में सैकड़ों की संख्या में एक नाम वाले राशन कार्ड जारी हो गए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में भी ऐसी ही स्थिति है। शहर का चुनाव पहले होने के कारण यहां कार्ड सुधरवाने के लिए जमकर बवाल मचा हुआ है। सबसे पहले एकल नाम वाले राशन कार्ड को लेकर जमकर हुआ था। इसके बाद मंत्री तक को राशन कार्ड सुधार कर देने की घोषणा करनी पड़ी।

पुराने कार्ड के अनुसार राशन देने की मांग

नए राशन कार्डों में ढेरों गलतियां होने के कारण लोगों को त्योहारी सीजन में कम अनाज मिल रहा है। इससे लोगों में गुस्सा है। त्योहार से पहले इन्हें सुधारकर ऑनलाइन नया आवंटन जारी करना लगभग असंभव हो गया है। ऐसे में शासन से सितंबर माह में आवंटित कोटे के अनुसार ही राशन जारी करने की मांग आने लगी है।

राशन कार्ड में जो गलतियां सामने आ रही हैं,उसे सुधारने का काम भी निंरतर चल रहा है। मुख्य रूप से डाटा एंट्री करने में गड़बड़ी हुई है जिसे सुधार लिया जाएगा।

केके सोमावार

खाद्य अधिकारी

Posted By: Nai Dunia News Network

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