बिलासपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि

हाईकोर्ट ने जनहित याचिका पर जिंदल स्टील एंड पावर को नोटिस जारी कर पूछा है कि लीज पर माइनिंग के लिए मिली जमीन का उत्खनन के बाद भराई के लिए क्या किया गया है।

मध्यप्रदेश सरकार ने 1997 में रायगढ़ स्थित जिंदल स्टील एंड पावर को माइनिंग के लिए रायगढ़ जिले के ग्राम नागरमुड़ा, सतरेंगा, डोंगामहुआ एवं धोराभाठा की जमीन लीज पर दी थी। शर्त के अनुसार कंपनी को उत्खनन के बाद गड्ढों की पटाई कर पेड़ लगाना था। इसके बाद भू स्वामियों को जमीन लौटानी थी। इस शर्त के तहत जमीन मालिकों को मुआवजा भी नहीं दिया गया। कंपनी ने 1997 से 2015 तक लीज में मिली जमीन में उत्खनन किया लेकिन इसकी भराई नहीं की। इसके अलावा पेड़ भी नहीं लगाया। खुदाई के बाद गड्ढे छोड़ दिए गए। इससे प्रभावित होने वाले ग्रामीण कन्हैया लाल सहित अन्य ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की। पिछली सुनवाई में हाईकोर्ट ने पर्यावरण मंडल को मौके में जाकर निरीक्षण करने और रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया था। मामले को सुनवाई के लिए मंगलवार को चीफ जस्टिस टीबी राधाकृष्णन व पी. सेम कोशी की डीबी में रखा गया। सुनवाई के दौराना रिपोर्ट पेश नहीं होने पर चीफ जस्टिस ने कहा कि मामले में पहले जिंदल ही ये बताए कि माइनिंग के बाद जमीन के रेस्टोरेशन के लिए क्या किया गया। मौके में कितने पौधे लगाए गए। कोर्ट ने कंपनी को जवाब पेश करने चार सप्ताह का समय दिया है। मामले की अगली सुनवाई 27 अप्रैल को होगी।

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