बिलासपुर। Obesity In Corona Era: कोरोना से ठीक होने वाले मरीजों को होने वालर अन्य शारीरिक परेशानियों को दूर करने के लिए सिम्स में पोस्ट कोरोना ओपीडी संचालित हो रही है। यहां हर दिन ठीक हो चुके संक्रमित कुछ न कुछ शारीरिक समस्या लेकर पहुंच रहे हैं। दो महीने से चल रहे कोरोना ओपीडी में चिकित्सकों को यह देखने को मिला है कि ठीक होने के बाद संक्रमितों को ज्यादा व असंतुलित भोजन करने की लत लग चुकी है। लगभग हर छठा व्यक्ति मोटापा से ग्रसित मिल रहा है।

एक साल के कोरोना काल में जिले से 23 हजार से ज्यादा कोरोना संक्रमित मिल चुके हैं। इसमें एक बात यह भी देखने को आई है कि ठीक होने के बाद कुछ को शारीरिक दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। लेकिन, ज्यादातर लोग एक खास तरह की तकलीफ लेकर अस्पताल पहुंच रहे हैं और उसके जिम्मेदार वे खुद ही बने हैं। दरअसल ये ज्यादा खाने की वजह से मोटापे के शिकार हो चुके हैं। पोस्ट कोरोना ओपीडी में रोजाना इस तरह के पांच से छह मामले सामने आ रहे हैं।

इन मामलों को देखते हुए पोस्ट कोरोना ओपीडी के प्रभारी व मेडिसीन विशेषज्ञ डा. पंकज टेम्भुर्णीकर का कहना है कि जो संक्रमित हुए हैं और ठीक हो गए हैं, उनमे फिर से संक्रमित होने का मनोवैज्ञानिक डर बना हुआ है। ऐसे में वे इस संक्रमण से बचने का प्रयास कर रहे हैं। इनमें उन्हे सबसे अच्छा रास्ता यह लग रहा है कि हृष्ट-पुष्ट रहेंगे तो उन्हें कोरोना का संक्रमण नहीं होगा। ऐसा इसलिए है कि चिकित्सकों द्वारा कहा गया है कि कोरोना से बचने रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाई जाए, इसके लिए संतुलित भोजन लेना जरूरी है। लेकिन, संक्रमण से ठीक हो चुके मरीज संतुलित भोजन को दरकिनार कर जो कुछ भी मिल रहा है उसे अवश्यकता से ज्यादा ग्रहण कर रहे हैं।

ऐसे में ज्यादा कैलोरी मिलने से इनका वजन बढ़ता जा रहा है और ये धीरे-धीरे मोटापे की श्रेणी में आकर अन्य कई प्रकार की बीमारी से पीड़ित हो रहे हैं। सिम्स में रोजाना इस तरह के मामले सामने आ रहे हैं। इसमें मोटा होने की बात लेकर ठीक हो चुके मरीज पहुंच रहे हैं। हालांकि ऐसे लोगों को कोई विशेष दवा नहीं दी जा रही है बल्कि उन्हें आवश्यक परामर्श व संतुलित भोजन लेने की सलाह देकर भेजा जा रहा है। साथ ही शारीरिक श्रम कर वजन कम करने की हिदायत दी जा रही है।

क्वारंटाइन अवधि में कई के पांच से सात किलो तक वजन बढ़ा

कुछ ऐसे मामले भी सिम्स में पहुंचे हैं जिसमें 14 दिन के क्वारंटाइन अवधि में लोगों के पांच से सात किलो तक वजन बढ़ गया है। यह असामान्य बात है। ऐसे मरीजों की काउंसिलिंग करने से पता चला कि वे इन 14 दिनों तक सिर्फ आराम करते रहे और शरीर की ताकत बढ़ाने के लिए लगातार खाते रहे। खाने में वैसे हर खाद्य सामग्री का सेवन किया गया है जो चर्बी बढ़ाता है। इसमें सादा खाना से लेकर मांसाहारी भोजन के साथ फास्ट फूड भी शामिल है।

पेट की सेहत भी बिगड़ी

ज्यादा खाने से वजन तो बढ़ रहा है। साथ ही पेट से संबंधित बीमारियों का सामना भी करना पड़ रहा है। इसमें गैस, एसिडिटी, पेट में जलन, खट्टी डकार आना, पेट में दर्द की शिकायत हो रही है। इसका सीधा संबंध अवश्यकता से ज्यादा भोजन करना बना है।

इन कारणों से बढ़ रहा वजन

- कोरोना से ठीक होने के बाद ज्यादा आराम व ज्यादा भोजन करने की आदत बनना।

- फेफड़ों को पूरी तरह से ठीक करने के लिए लंबे समय तक स्टेरायड दवा का उपयोग करना। जो वजन बढ़ाने में सहायक होता है।

- उपचार व उपचार के बाद के आइसोलेशन अवधि में घर पर रहते हुए शारीरिक मेहनत न करना व प्रोटीन युक्त भोजन करना।

- कोरोना के बाद पूरी तरह से आराम पसंद हो जाना।

सामान्य व्यक्तियों का भी बढ़ा मोटापा

यह भी देखने को मिला है कि जो कोरोना से संक्रमित नहीं हुए हैं, उनमें भी मोटापा की शिकायत आ रही है। क्योंकि लाकडाउन के दौरान लोगों का एक वर्ग आराम तलब हो गया। शारीरिक मेहनत भी छूट गई और खाने की लत बढ़ गई है। इसने सीधे तौर पर उन्हें मोटापा के दहलीज में लाकर खड़ा कर दिया है।

सामान्य व्यक्ति भी मोटापा की शिकायत लेकर अस्पताल पहुंच रहे हैं। वही एक दूसरा वर्ग ऐसा भी है जिसने लाकडाउन का सदउपयोग किया और इस दौरान संतुलित भोजन, योगा, कसरत और नियमित दिनचर्या बनाया। इसका परिणाम यह निकला कि ये पहले से ज्यादा स्वस्थ हो चुके हैैं, जिनका अब कोरोना वायरस हानि नहीं पहुंचा सकता है।

चिकित्सकों ने दी सलाह

- रोजाना योग या कसरत करें।

- फास्ट फूड से दूर रहेें।

- मांसाहारी भोजन एक निश्चित मात्रा में लेें।

- नियमित दिनचर्या बनाने के साथ शारीरिक श्रम करें।

- संतुलित आहार ग्रहण करेें।

- रोजाना पैदल चलें या फिर साइकिल चलाएं।

- भोजन करने व सोने का समय निर्धारित करें।

औसतन पहुंच रहे 20 से 25 मरीज

सिम्स के पोस्ट कोविड ओपीडी में रोजाना कोरोना से ठीक हो चुके 20 से 25 मरीज पहुंच रहे हैं। उनमें से मोटापा की समस्या के अलावा हाथ-पैर में दर्द, कमजोरी, चिड़चिड़ापन के साथ कुछ मानसिक परेशानियों से जूझ रहे हैं। उन्हें आवश्यकतानुसार परामर्श दिया जा रहा है।

Posted By: sandeep.yadav

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