बिलासपुर(नईदुनिया प्रतिनिधि)। जस्टिस पार्थ प्रतीम साहू द्धारा हाई कोर्ट में सर्विस मैटर में लगातार लंबित मामलों को गंभीरता से लिया है। 29 सितंबर गुरुवार को उन्होंने एक घंटे अतिरिक्त शाम 5.30 बजे तक बैठकर सर्विस मामलों की सुनवाई की और तेजी से प्रकरणों की निराकरण किया।

एक अक्टूबर 2022 से नौ अक्टूबर 2022 तक हाई कोर्ट में दशहरा अवकाश रहेगा। इस दौरान सिर्फ अर्जेंट मामलों की ही सुनवाई होगी। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में लंबित मामलों की संख्या में साल-दर-साल बढ़ोतरी होती जा रही है। जुलाई 2016 की स्थिति में जहां 54 हजार 433 मामले लंबित थे। वर्तमान में इसकी संख्या 86 हजार के करीब पहुंच गई है। मतलब पिछले छह सालों में 32 हजार मामले और पेंडिंग हो गए। दूसरी ओर हाई कोर्ट में जजों के कुल 22 पद मंजूर हैं, लेकिन वर्तमान में चीफ जस्टिस समेत सिर्फ 14 जज ही कार्यरत हैं। आठ पद खाली हैं।

मध्य प्रदेश से अलग होने के बाद नवंबर 2000 में छत्तीसगढ़ राज्य बना। बिलासपुर को न्यायधानी घोषित करते हुए यहां हाई कोर्ट की स्थापना की गई। नवंबर 2000 की स्थिति में हाई कोर्ट में 20 हजार 886 मामले पंजीकृत थे। इसमें सिविल मामलों की संख्या 7,158 और क्रिमिनल मामलों की संख्या 9,294 थी। मंजूर पदों से लगातार कम जजों की नियुक्ति होने की वजह से पेंडेंसी का आंकड़ा तकरीबन हर साल बढ़ता रहा। स्थिति यह है कि हाई कोर्ट की स्थापना के बाद से ही से स्वीकृत पदों की तुलना में जजों की संख्या कम ही रहती है। वर्तमान में जजों के 22 पद मंजूर हैं, लेकिन चीफ जस्टिस समेत सिर्फ 14 जजों की ही नियुक्ति की गई है।

रोजाना 400 से अधिक केस हो रहे हैं फाइल

देखा जाए तो छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट की स्थापना के बाद से ही लगातार जजों की कमी से पेंडेंसी बढ़ी है। विचाराधीन मामलों का बोझ घटने के बजाय बढ़ता ही जा रहा है। मिली जानकारी के मुताबिक सामान्य दिनों में रोजाना 400 से अधिक हाई कोर्ट में फाइल होती हैं। इसमें सिविल के साथ सर्विस, क्रिमिनल और दूसरे मामले शामिल हैं। ज्ञात हो कि सेवानिवृत्ति, त्यागपत्रों या न्यायाधीशों के प्रमोशन के कारण अदालतों में रिक्तियां होती रहती हैं।

Posted By: Abrak Akrosh

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