बिलासपुर। Paddy Crop in Bilaspur: अक्टूबर महीने के अंतिम 15 दिन मध्यम और विलंब वेरायटी के धान की फसल के लिए ज्यादा ही खतरा रहेगा। धान की बाली में दूध भराई का काम हो रहा है। इसी बीच भूरा माहो और कीटों का हमला भी हो रहा है। अन्न्दाता किसानों को 15 दिन ज्यादा ही सतर्क रहना पड़ेगा व धान की बाली को इन कीटों से बचाकर रखना होगा।

मौसम में नमी और गर्मी को भूरा माहो और कीटों के आदर्श मौसम माना जाता है। अक्टूबर के महीने में जैसे-जैसे गर्मी बढ़ती जाती है और बदली आती है तब माहो व कीटों का हमला खेतों में खड़ी धान की फसल पर होने लगता है। ऐसे मौसम में ये ज्यादा पनपते हैं और तेजी के साथ हमला करते हैं।

धान की बालियों में बैठे जाते हैं और बालियों में भर रहे दूध को चूसने लगते हैं। दूध भराने से ही पहले ही माहो धान की बाली को सूखा देता है। धान की बाली बदरा हो जाती है। किसानों की मेहनत पर पानी फिर जाता है। ठाकुर छेदीलाल बैरिस्टर कृषि महाविालय के अधिष्ठाता व धान विशेषज्ञ डॉ. आरकेएस तिवारी का कहना है कि आमतौर पर अक्टूबर के महीन में मौसम में बदलाव आता है। तेज गर्मी, बदली और उमस का वातावरण रहता है।

यही तीनों मौसम भूरा माहो और कीटों के लिए आदर्श होता है। इसी मौसम में ये पनपते हैं और धान की खड़ी फसल को बर्बाद करते हैं। अक्टूबर का 15 दिन निकल गया है। अंतिम 15 दिन किसानों के लिए निर्णायक है। मध्यम व लेट वेरायटी के धान की फसल में दूध भराई हो रहा है। भूरा माहो और कीटों से इसे बचाना होगा। दवाओं का छिड़काव नियमित रूप से करना चाहिए।

Posted By: sandeep.yadav

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