बिलासपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि

भाद्र शुक्ल पक्ष पूर्णिमा पर प्रोष्ठपदी श्राद्ध 13 सितंबर शुक्रवार से शुरू हो गया है। इससे 15 दिनों मांगलिक कार्य भी नहीं होंगे। 28 सितंबर शनिवार कृष्ण पक्ष अमावश्या तक पितृपक्ष में पितरों के तर्पण के साथ पितृपक्ष पूर्ण होगा। शनिवार को प्रतिपदा श्राद्ध है। शाम को आस्थावान अपने पितरों की आह्वान करेंगे और घर आंगन को पवित्र कर सजाएंगे।

संत जलाराम मंदिर के पुजारी पं.ब्रम्हदत्त मिश्र ने बताया कि पितरों की तृप्ति व स्वयं की आत्मोन्नति के लिए श्रद्धापूर्वक तर्पण और पिंडादान करना चाहिए। श्राद्ध कर्म में कुपत वेला मध्यान्ह 11.40 से 12.20 बजे तक के समय में काला तिल, गंगाजल, तुलसी व ताम्रपत्र से करना चाहिए। लोहे का पात्र श्राद्ध में वर्जित है। साथ ही गौग्रास देने से पितरों को प्रसन्नता मिलती है। इस वजह से इन दिनों पितरों की प्रसन्नता के लिए कार्य करना चाहिए। सौभाग्यवती स्त्री का श्राद्ध नवमीं तिथि को, शस्त्र, विष आदि से मृतकों का श्राद्ध चतुर्दशी तिथि को करना चाहिए।

13 शुक्रवार पूर्णिमा श्राद्ध, 14 शनिवार प्रतिपदा श्राद्ध, 15 रविवार को द्वितीय श्राद्ध, 17 मंगलवार तृतीया श्राद्ध, 18 बुधवार महाभरणी चतुर्थी श्राद्ध, 19 गुरुवार पंचमी श्राद्ध, 20 शुक्रवार छठी श्राद्ध, 21 शनिवार सप्तमी श्राद्ध, 22 रविवार अष्टमी श्राद्ध, 23 सोमवार नवमीं श्राद्ध, 24 मंगलवार दशमी श्राद्ध, 25 बुधवार एकादशी व द्वादशी श्राद्ध, 26 गुरुवार मघा श्राद्ध व त्रयोदशी श्राद्ध, 27 शुक्रवार चतुर्दशी श्राद्ध और 28 सितंबर शनिवार को सर्वपित्र अमावस्या है।