बिलासपुर(निप्र)। तेज हवा और गरज-चमक के साथ प्री मानसून ने अपनी दस्तक दे दी है। इसी के साथ शहर में बिखरे अधूरे काम इस बार बड़ी मुसीबत के रूप में सामने हैं। इनमें से कई काम को पूरा करना तो दूर उसे समेटने के लिए भी निगम के अमले को खासी जद्दोजहद करनी पड़ रही है। ऐसे में अब की बार बारिश शहर के लिए समस्या लेकर आने वाली है।

निगम अधिकारियों के अनुसार बड़े प्रोजेक्ट को छोड़ दिया जाए तो करीब 50 करोड़ रुपए के काम ऐसे हैं जो वर्तमान में शहर के अंदर चल रहे हैं। इसमें सभी अधूरे काम हैं। कुछ पूरा होने की स्थिति में है तो कई अभी शुरू हुए हैं। यह स्थिति तब है जब मानसून शहर में 15 से 20 दिनों में पहुंच जाने का अनुमान लगाया जा रहा है। वैसे भी सरकारी रिकार्ड के अनुसार प्रदेश में 15 जून से मानसून सीजन शुरू हो जाता है। इस दौरान निर्माण कार्य पर एक तरह से ब्रेक लग जाता है। क्योंकि इस दौरान विशेषकर सड़क, नाली का काम नहीं हो पाता है। भवन निर्माण भी चुनिंदा जगहों में चलता है। ऐसे में निगम के इंजीनियर बारिश के सीजन से अब तक बेपरवाह बने हुए हैं। यही कारण है कि शहर के अंदर चल रहे निर्माण कार्य अब भी दो दिन चले अढ़ाई कोस के अंदाज में बेहद मंथर गति से चल रहे हैं। इसके अलावा जो काम बारिश से पूर्व पूरे नहीं हो सकते, उसे समेटने की भी तैयारी नहीं हो रही है। ऐसे में अगर बारिश शुरू हो गई तो लोगों के लिए यह दोगुनी मुसीबत लेकर आएगी। पहले से ही सीवरेज की खुदाई से बेहाल सड़क पर बिखरे निर्माण सामग्री किसी मुसीबत से कम नहीं होंगी। वर्तमान में कई सड़क तो ऐसी हैं जिस पर बरसात शुरू होते ही चलना भी मुश्किल है। अधिकारी इन निर्माण कार्यों को व्यवस्थित करने के बजाय सारा दोष सीवरेज की खुदाई के सिर मढ़ने में लगे हैं। इससे इस समस्या का हल फिलहाल नहीं दिख रहा है।

बेलगाम सीवरेज

शहर के अंदर जहां सीवरेज की खुदाई हुई है, उन सारों सड़कों को केवल रेत और गिट्टी डालकर पाटा गया है। इसे रेस्टोरेशन करके बनाने की कोशिश अब तक नहीं हुई है। जबकि इस सीजन में मौसम साफ होने के कारण सारे डामर प्लांट चल रहे हैं और कांक्रीट के अलावा डामरीकरण का काम भी हो सकता है। इसके बाद भी ठेकेदार ने किसी भी रोड का न तो डामरीकरण किया और न ही डामर वाला काम ही शुरू किया है। इसके चलते मुंगेली रोड, बृहस्पतिबाजार रोड, हेमू नगर रोड, गणेश नगर रोड, तोरवा रोड जैसी प्रमुख सड़क की स्थिति दयनीय हो गई है। यहां सड़क के एक तरफ खुदाई हुई है और दूसरी तरफ मिट्टी फैली हुई है। बारिश हुई तो यहां न तो खुदाई वाली जगह पर ट्रैफिक चल पाएगा और न ही दूसरी तरफ गीली मिट्टी के कारण ट्रैफिक चल पाएगा।

फंड है लेकिन योजना नहीं

नगरीय प्रशासन मंत्री अमर अग्रवाल का विधानसभा क्षेत्र होने के कारण शहर को विभिन्न विकास कार्यों के लिए मुंहमांगी राशि मिल रही है। सप्ताहभर पूर्व विभिन्न विकास कार्यों के लिए मांगे गए 20 करोड़ रुपए का पैकेज फिर मिल गया है। इस तरह फंड की कोई कमी नहीं होने के बाद भी विकास कार्य बड़ी मुसीबत बना हुआ है। इसका मुख्य कारण शहर में प्लानिंग के अनुसार काम नहीं होने को माना जा रहा है। अधिकारी एक काम को पूरा कराने के बजाय दूसरी जगह नया काम शुरू करा देते हैं। इसके चलते अधूरे निर्माण कार्यों की संख्या बढ़ जाती है और लोगों के लिए यह किसी मुसीबत से कम नहीं होता है। इसके अलावा एक ही ठेकेदार को उसकी क्षमता से अधिक काम दे देने के कारण भी काम अधूरा रहने की समस्या रहती है।

लिंक रोड में बन रहा डिवाइडर

जिला प्रशासन और निगम प्रशासन के लिए लिंक रोड प्रयोगशाला बन चुकी है। सारे नए प्रयोग इस सड़क पर होते हैं। चाहे पेड़ काटकर सड़क चौड़ी करने का प्रयोग हो, सेंट्रल पार्किंग, डिवाइडर, नई डिजाइन का पोल सब कुछ इसी सड़क पर किया जाता है। यहां अग्रसेन चौक से तारबाहर चौक तक चल रहा डिवाइडर का काम अब तक पूरा नहीं हुआ है। अब भी ठेकेदार बीच सड़क पर निर्माण सामग्री फैलाकर काम कर रहा है। डिवाइडर बनने के बाद उसकी तराई फिर बीच में मिट्टी डालने का काम भी अभी अधूरा है। अगर अब भी इस काम में तेजी नहीं आई तो बारिश के दौरान डिवाइडर का काम अधूरा ही रह जाएगा। यहां डिवाइडर पर लगा विद्युत पोल भी अब तक ठूंठ की तरह ही लगा हुआ है। ठेकेदार ब्लैक लिस्टेड हो चुका है, लेकिन इन पोल पर बिजली कौन लगाएगा यह अब तक तय नहीं है।

मंगला रोड की नाली

शहर में यह एक ऐसी नाली है जिसका निर्माण दो साल से चल रहा है। होमगार्ड रोड से मंगला की तरफ बन रही इस नाली को ठेकेदार की मर्जी पर छोड़ दिया गया है। अचानक यहा काम शुरू हो जाता और और अचानक बंद। अब जब यह मुश्किल से सौ मीटर ही बचा है,तब भी काम बहुत धीमा किया जा रहा है। मानसून आने में चंद दिन ही शेष है। ऐसे में नाली का काम जल्द नहीं हुआ तो बरसाती पानी एक बार फिर मंगला और कुुदुदंड क्षेत्र में बड़ी मुसीबत लेकर आएगा। नाली नहीं बनने से निकासी की व्यवस्था ठीक नहीं हुई तो कई घरों में बरसात का पानी भर सकता है। इस नाली के महत्व को देखते हुए भी निगम के अधिकारी इसे जल्द पूरा कराने में कोई रुचि नहीं ले रहे हैं।

नाले पर बननी है रोड

दीप होटल के बगल से नाले के ऊपर बनने वाली कांक्रीट रोड का काम भी बहुत ही धीमे गति से चलने वाले निर्माण कार्यों में शामिल है। जबकि इस सड़क को लिंक रोड की बहुप्रतीक्षित बाइपास माना जा रहा है। पुराने बसस्टैंड की तरफ जाने वाले लोगों के लिए सड़क बहुत ही उपयोगी है। पहले तो वर्कआर्डर मिलने के बाद भी ठेकेदार ने यहां काम शुरू ही नहीं किया। महीनेभर बाद जब उसके कर्मचारी यहां पहुंचे तो वो भी बहुत धीमे गति से इस काम को कर रहे हैं। इस नाले में दो दर्जन बड़ी कॉलोनियों का पानी आता है। सामान्य दिनों में भी इसमें अच्छा खासा पानी रहता है। ऐसे में अगर बारिश हुई तो इस नाले पर काम करना असंभव हो जाएगा। इसे जानते हुए भी समय से काम नहीं करने के कारण निकल भविष्य में काम पूरा होने की संभावना नगण्य है।

गौरव पथ

उबड़खाबड़ गौरव पथ पर ट्रैफिक चल रहा था। नगर निगम ने इसे नया बनाने का काम शुरू किया तो उलटे मुसीबत बढ़ गई। सीवरेज का बचा हुआ काम कराने के लिए इसे फिर से खोदने की अनुमति दे दी गई। इसी के साथ ठेकेदार को सड़क निर्माण करने के लिए भी कहा गया था। यहां सीवरेज और सड़क निर्माण दोनों का काम बहुत ही धीमी गति से चलने के कारण अब इसके बारिश पूर्व पूरा होने की संभावना भी कम होती जा रही है। यहां सड़क पर डामरीकरण का काम होना है। अगर सड़क जल्द नहीं बनी और बारिश शुरू हो गई तो डामरीकरण करना संभव नहीं हो पाएगा। इस तरह लोगों को बारिश समाप्त होने तक फिर तीन माह इसी खस्ताहाल सड़क पर चलने की मजबूरी होगी। ठेकेदार द्वारा सड़क पर ही निर्माण सामग्री बिखरा कर रखी गई है। इससे मुसीबत बढ़ गई है।

इंजीनियरों और सीवरेज के ठेकेदार को पहले ही बारिश को देखते हुए काम करने के लिए कहा गया है। अधूरे काम के कारण लोगों को परेशानी नहीं होने दी जाएगी। अभी कुछ समय शेष है। इस दौरान जो काम पूरे सकते हैं उसे जल्द करा लिया जाएगा। वैसे भी अब बहुत से काम बारिश के दौरान भी हो सकते हैं। ऐसे में बहुत ज्यादा दिक्कत वाली स्थिति नहीं है।

किशोर राय

महापौर

नगर निगम

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