बिलासपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि

शहर में भू-जल का बेहिसाब दोहन के कारण हर साल जलस्तर नीचे जा रहा है। ऐसे में निगम अधिकारियों को गर्मी के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए थे। समीक्षा के बाद निष्कर्ष यह निकला कि शहर में नए पंप कराना ही एकमात्र विकल्प है। नतीजतन गर्मी के पहले फिर शहर में खोदाई शुरू होगी। 94 पंप गर्मी के लिए शहर में किए जाएंगे।

शहर की पूरी पेयजल व्यवस्था भूमिगत जल पर निर्भर है। इसका मतलब यह है कि अगर पानी चाहिए तो शहर की खोदाई करनी पड़ेगी। नेताओं ने इसे रोकने के लिए कई वादे तो किए लेकिन किसी पर अमल नहीं हुआ। खूंटाघाट से पानी लाने की स्कीम चल रही है,लेकिन उसके पूरा होने में अभी दो साल का समय में है। इसके अलावा खूंटाघाट से पानी लाने के मामले में अहिरन नदी को लेकर विवाद भी है। ऐसे में इस साल जब फिर पेयजल को लेकर गर्मी की तैयारी करने कहा गया तो फिर निगम का अमला अपनी रटा रटाई स्कीम लेकर आ गए। शहर को कई जगहों से खोदकर पानी निकाला जाएगा और उससे पेयजल की व्यवस्था की जाएगी। इसके अलावा गर्मी के पूर्व निगम अपने पानी टैंकरों को भी तैयार कर रहा है। शहर के लोगों से मांग आने पर इन टैंकरों के जरिए ही पेयजल की सप्लाई की जाएगी। निगम के पास 40 टैंकर हैं। इसमें से 10 बिगड़े टैंकर की मरम्मत कराई जा रही है। इस बार क्षेत्र बड़ा हो जाने के कारण सभी जगहों पर पेयजल सप्लाई की नई चुनौतियों से निगम का सामना होने वाला है। जबकि निगम के अधिकारियों की प्राथमिकता पुराना निगम क्षेत्र है। इससे नए शामिल क्षेत्रों में पेयजल संकट होने की आशंका जताई जा रही है।

40 पंप स्वीकृत

14 पंप पानी टंकी के लिए होंगे

40 नए पंप स्वीकृति के लिए डीएमएफ फंड से राशि की मांग

40 टैंकर

10 बिगड़े हुए

21 चालू हालात में

9 ग्रामीण क्षेत्रों में मौजूद

गर्मी की तैयारी शुरू हो गई है। समस्याग्रस्त जगहों पर नए पंप कराकर पेयजल सप्लाई की व्यवस्था की जाएगी। इसके अलावा पानी देने का फिलहाल कोई विकल्प नहीं है। अमृत मिशन योजना तैयार होने के बाद ही स्थाई राहत मिलेगी। तब तक नए पंप करके पानी लेने की मजबूरी है।

अजय श्रीवासन

जल शाखा प्रभारी, नगर निगम

Posted By: Nai Dunia News Network

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