बिलासपुर। Bilaspur News: ग्रामीण महिलाओं के जीवन में गोठान ने आर्थिक संपन्न्ता का एक नया रंग भर दिया है। ग्रामीण महिलाओं को समूह के माध्यम से एक ही समय में एक से अधिक कार्य करके आर्थिक मजबूती दिलाने का करने का रास्ता गोठानों ने बखूबी दिखाया है। जिले में 127 गोठानों में 204 स्व सहायता समूह की एक हजार 481 महिलाएं आर्थिक रूप से स्वावलंबी हो गई है एवं अन्य महिलाओं को भी इस दिशा में प्रेरित कर रही है। गोठानों में 15 आजीविका गतिविधियां चलाई जा रही है। बिलासपुर जिले में दो करोड़ 72 लाख स्र्पये से अधिक का कारोबार किया जा चुका है।

गोठानों में वर्मी कंपोस्ट,सुपर कंपोस्ट,सामुदायिक बाड़ी,मशरूम उत्पादन मछली पालन,मुर्गी पालन,बकरी पालन,गोबर का दीया, गोबर का गमला, अगरबत्ती, साबुन निर्माण सहित करीब 15 गतिविधियां संचालित की जा रही है। जिले में गोठानों के माध्यम से एक लाख 33 हजार 263 क्विंटल गोबर की खरीदी की जा चुकी है। 18 हजार 670 क्विंटल वर्मी खाद का निर्माण किया गया है एवं 16 हजार 301 क्विंटल वर्मी खाद की बिक्री की गई है। इसके अलावा 14 हजार 172 क्विंटल सुपर कंपोस्ट बनाया गया है एवं 6 हजार 787 क्विंटल सुपर कंपोस्ट खाद की बिक्री की जा चुकी है।

शिवतराई की महिलाओं ने बनाया कीर्तिमान

एक ही समय में कई गतिविधियां संचालित कर आर्थिक मजबूती प्राप्त करने के मामले में शिवतराई की महिलाओं ने कीर्तिमान बनाया है। समूह की महिलाओं ने बीते दो साल में 10 लाख स्र्पये केखाद एवं साढ़े चार लाख स्र्पये का केंचुआ बेचकर अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत कर ली है। यहां आशीष महिला स्व सहायता समूह ने मुर्गी पालन से 12 हजार 877 स्र्पये की आमदनी अर्जित की है।

Posted By: sandeep.yadav

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