बिलासपुर(नईदुनिया प्रतिनिधि)।Protection of Vultures: अचानकमार टाइगर रिजर्व प्रबंधन ने गिद्धों के संरक्षण को लेकर प्रशिक्षण आयोजित किया गया है। वन अमले को संरक्षण की विधि व आगामी दिनों में होने वाली गणना व पहचान आदि की विस्तृत जानकारी देने के लिए भोपाल, लखनऊ व गुवाहाटी से तीन विशेषज्ञ भी पहुंचे। सुबह मौखिक की जानकारी देने के बाद वनकर्मियों को गिद्ध प्रभावित क्षेत्र औरापारा का दौरा भी कराया गया।

प्रशिक्षण में अचानकमार टाइगर रिजर्व के अलावा गुरु घासीदास नेशनल पार्क व इंद्रावती टाइगर रिजर्व के वनकर्मी व अधिकारी शामिल हुए हैं। दरअसल कैंपा मद से इन्हीं तीनों जगहों को गिद्ध संरक्षण के चयन किया गया है। यहां गिद्धों की मौजूदगी भी है। संकटग्रस्त प्रजाति होने के कारण ही विभाग इसका संरक्षण करने पर जोर दे रहा है। हालांकि यहां कर्मचारी बहुत अधिक गिद्धों के जानकार नहीं है।

इसलिए ऐसे विशेषज्ञों की मदद ली जा रही है, जो जानकार हैं। इसके तहत गुवाहाटी से सचिन रानाडे, भोपाल से रोहन श्रीरंगपुर और लखनऊ से हेमंत वाजपेयी को बुलाया गया है। 50 से अधिक संख्या में पहुंचे तीनों जगहों के वनकर्मी व अधिकारियों को उन्होंने छत्तीसगढ़ में मिलने वाले गिद्धों की प्रजाति के बारे में बताया। रहवास क्षेत्रों में सुरक्षा के उपाय और गणना किस विधि से करनी है। इसकी जानकारी दी। ट्रांसमीटर व टैग लगाने की बात भी कही गई। इससे उनके अन्य रहवास के बारे में पता चलेगा।

एटीआर के औरापानी में 60 से 65 गिद्ध

अचानकमार टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर सत्यदेव शर्मा ने बताया कि औरापानी बीट में जिस वनकर्मी को तैनात किया गया है वह इन नियमित नजर रखता है। वनकर्मी के अनुसार ही यहां 60 से 65 की संख्या में गिद्ध हैं। संरक्षण पर जोर देने से संख्या बढ़ेगी।

क्यों जरूरी है गिद्ध

गिद्ध एक मृतोपजीवी पक्षी है, जिसका पांचनतंत्र मजबूत होता है। यही वजह है कि वह रोगाणुओं से परिपूर्ण सड़ा गला मांस भी पचा जाते हैं और संक्रामक रोगों का विस्तार रोकते हैं। इनके न होने से जंगल पशु-पक्षियों में विभिन्न् संक्रामक रोग फैलने का खतरा रहता है।

Posted By: anil.kurrey

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