बिलासपुर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। शहर का दूसरा प्रमुख रेलवे स्टेशन उसलापुर में पार्सल उतारने और चढ़ाने में दिक्कत आ रही है। ऐसा रेल प्रशासन की अनदेखी के कारण हो रहा है। इतने बड़े स्टेशन में पार्सल का कामकाज केवल एक कर्मचारी के भरोसे है। इस एम कर्मचारी पर पूछताछ केंद्र की जवाबदारी भी है। इसकी वजह से आए दिन ट्रेनों के एसएलआर कोच से पार्सल नहीं उतर पाता है और यह दुर्ग पहुंच जाता है। वहां से दुर्ग- अंबिकापुर एक्सप्रेस या फिर दूसरी ट्रेन पार्सल को भेजा जाता है। इस अव्यवस्था की वजह से यात्रियों को समय पर नहीं मिल रहा है और उन्हें परेशानी होती है।

सेकंड टर्मिनल बनाने की दिशा में उसलापुर स्टेशन को विकसित करने के साथ सुविधाआएं बढ़ाई जा रही हंै। इन कार्यों के कारण अब उसलापुर का स्वरूप भी बदला है। लेकिन एक समस्या को ठीक करने के लिए रेल प्रशासन के पास फुर्सत नहीं है। यह दिक्कत फरवरी 2020 से आ रही है। उस समय पार्सल उतारने और चढ़ाने के लिए रेलवे ने 12 हमालों को रखा था। उन्हें रेलवे भुगतान भी करती थी। इसके बाद मार्च 2020 में कोरोना के कारण लाकडाउन लगा और ट्रेनों का परिचालन बंद हो गया।

जब ट्रेनें दोबारा पटरी पर आई तो रेलवे ने इस समस्या की अनदेखी कर दी है। लगभग तीन साल गुजरने को है, लेकिन यहां हमाल की व्यवस्था की गई और न अतिरिक्त रेलकर्मियों की पार्सल में ड्यूटी लगाई गई। अब तो सभी ट्रेनें भी पटरी पर आ चुकी है। उसलापुर स्टेशन में अप व डाउन दिशा को मिलाकर लगभग 34 ट्रेनों का ठहराव है। इनमें कुछ ट्रेनों को छोड़ दिया जाए तो सभी में उसलापुर से लोडिंग व अनलोडिंग होती है। स्टाफ कमी के कारण दोनों में दिक्कत आ रही है। बेतवा एक्सप्रेस, हम सफर एक्सप्रेस, नवतनवा एक्सप्रेस जैसी लंबी दूरी की ट्रेनों में उसलापुर के लिए बुक पार्सल केवल इसलिए नहीं उतर पाता, क्योंकि एक कर्मचारी पर इसकी जिम्मेदारी है।

वह भी किसी तरह कुलियों या फिर सफाई कर्मचारियों को बोलकर पार्सल उतारने का प्रयास करता है। लेकिन 10 मिनट के ठहराव में सभी पार्सल उतार पाना मुश्किल होता है। खासकर जब बाइक बुकिंग हो तो उतर ही नहीं पाता। बाइक पार्सल के बीच इतना अंदर दबा रहता है कि कर्मचारी इतने कम समय पर पार्सल को निकाल नहीं पाते। इन तीनों ट्रेनों सबसे ज्यादा दिक्कत आती है। इसके बावजूद रेल प्रशासन हमाल रख रहा है और न ही अतिरिक्त कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई जा रही है। रेलवे की इस अव्यवस्था का खामियाजा यात्रियों को भुगतना पड़ रहा है।

प्लेटफार्म के बाहर आती है पार्सल बोगी, कैसे चढ़ाएं बाइक या अन्य पार्सल

जितनी समस्या पार्सल अनलोडिंग के समय आती है, उससे कहीं ज्यादा लोडिंग के दौरान आती है। इस स्टेशन के प्लेटफाम दो और तीन दोनों की लंबाई कम है। इसलिए लंबी ट्रेनों के दो से तीन कोच प्लेटफार्म से बाहर निकल जाते हैं। उस स्थिति में पार्सल चढ़ाने के लिए इतनी जद्दोजहद करनी पड़ती है कई बार ट्रेन में पार्सल भी नहीं चढ़ा पाते। ट्रेन भी विलंब नहीं की जा सकती, क्योंकि इसमें जवाब-तलब होगा कि जिसके कारण ट्रेन विलंब हुई है, उसे जवाब देने में पसीना छूट जाएगा।

इन्होंने कहा

इस समस्या की जानकारी नहीं थी। आपने संज्ञान में लाया तो इसकी जानकारी लेकर व्यवस्था सुधारने का प्रयास किया जाएगा। यह भी देखा जाएगा की अभी इस स्टेशन में पार्सल लोडिंग व अनलोडिंग की कैसी स्थिति है। यात्रियों को बेहतर सुविधा देना रेलवे की पहली प्राथमिकता है।

विकास कश्यप

सीनियर डीसीएम, बिलासपुर रेल मंडल

Posted By: Yogeshwar Sharma

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