बिलासपुर(नईदुनिया प्रतिनिधि)। शासकीय रेलवे पुलिस थाने में जब्त गांजा का नष्ट किया जाएगा। इसके लिए प्रक्रिया शुरू कर दी गई। तहसीलदार से सत्यापन भी करा लिया गया है। मजिस्ट्रेट से अनुमति मिलने के बाद नष्टीकारण किया जाएगा।

जीआरपी में 2018 के बाद से गांजा नष्टीकरण नहीं हुआ है। यही वजह है कि जब्त गांजा भारा मात्रा में थे थाने के मालगोदाम में ही पड़ा हुआ है। गांजा के अलावा यह कक्ष यात्रियों के सामान आदि से भरा हुआ है। हालत यह है कि मालगोदाम में अब अतिरिक्त सामान रखने तक की जगह नहीं है। इसे देखते हुए ही जीआरपी ने नष्टीकरण की प्रक्रिया शुरू की। इसके तहत शनिवार को तहसीलदार थाने पहुंची थी। उनसे सत्यापन कराया गया है।

गांजा नष्टीकरण में यह जरुरी प्रक्रिया है। इससे यह स्पष्ट होता है कि थाने में कितना गांजा जब्त है। इसे नष्ट करना भी जरुरी है। मालूम हो कि रेलवे में सुरक्षा के दो विभाग जीआरपी व आरपीएफ दोनों काम करती है। दोनों ही गांजा जब्ती की कार्रवाई करते हैं। हालांकि आरपीएफ को कार्रवाई करने का अधिकार नहीं है, इसलिए उनके जब्त के बाद आरोपित व जब्त गांजा जीआरपी को सौंप दिया जाता है। जीआरपी भी लगातार इस तरह के प्रकरण पर कार्रवाई करती है।

वैसे भी शहर समेत दूसरे राज्यों में गांजा तस्करी का सबसे बड़ा माध्यम ट्रेन ही है। ओडिशा की ओर से आने वाली ट्रेनों में ज्यादा गांजा का परिवहन होता है। लगातार जांच में टीम को सफलता भी मिल रही है। जीआरपी के अनुसार जब्त गांजा 32 प्रकरणों के है। ये कितनी मात्रा में यह न्यायालय से नष्टीकरण की अनुमति लेने के समय इसकी जानकारी भी प्रस्तुत की जाएगी।

यही वजह है कि थाने में एक कर्मचारी गांजा का वजन करा रहा है। जीआरपी का कहना है कि बीच नष्टीकरण की प्रक्रिया हो जाती, लेकिन कोरोना संक्रमण की वजह से मामला लंबित हो गया है। इसलिए मात्रा भी अधिक हो गई है।

Posted By: Manoj Kumar Tiwari

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