बिलासपुर।Railway News Bilaspur: आइआरसीटीसी का सिरगिट्टी स्थित प्लांट में रेलनीर का उत्पादन फिलहाल बंद कर दिया गया है। दरअसल कोरोना संक्रमण के कारण ट्रेन व यात्रियों की संख्या कम होने से संचालकों की तरफ से बहुत कम डिमांड आ रही है। इसके चलते प्लांट में बचत स्टाक बढ़ते जा रहा है। वर्तमान में 28 हजार बाक्स रेलनीर रखे हुए हैं। जब इसकी पूरी खपत हो जाएगी। तब पुन: उत्पादन शुरू करने का निर्णय लिया गया है।

कोरोना संक्रमण की दूसरी में भी ट्रेनों का परिचालन प्रभावित हो रहा है। हालांकि अभी तक कुछ ट्रेनें ही रद की गईं है, जो चल रहीं है उनमें भी यात्रियों की संख्या बेहद कम रहती है। रेलवे नुकसान में ट्रेनों का परिचालन कर रही है। पर इससे जो निजी लोगों का व्यवसाय होता है वह पूरी तरह प्रभावित है। स्टाल से लेकर बड़ी फूड यूनिट, जनआहार सभी नुकसान हो रहा है।

हालांकि पहली लहर के बाद लाइसेंस शुल्क कम कर रेलवे व आइआरसीटीसी ने इसे दोबारा खुलवाया था, ताकि यात्रियों को खानपान में दिक्कत न हो। स्थिति धीरे- धीरे सामान्य होने लगी थी। इस बीच दूसरी लहर की आई और दोबारा परिचालन से लेकर अन्य कामकाज प्रभावित होने लगा। बिलासपुर स्थित जनआहार केंद्र को तो संचालक ने एक दिन पहले बंद ही कर दिया है। इसका असर रेलनीर पर भी पड़ा है।

ट्रेन में यात्री सफर ही नहीं कर रहे हैं इसलिए स्टेशन हो ट्रेन दोनों जगहों पर रेलनीर की बिक्री भी कम हो गई। इस वजह से संचालक रेलनीर की मांग बेहद कम कर रहे हैं। स्थिति ऐसी नहीं कि आइआरसीटीसी संचालकों पर दबाव बना सके। इसलिए वह जितने की मांग करते हैं,उन्हें उतना ही रेलनीर दिया जाता है।

अकेले बिलासपुर रेलवे स्टेशन में 500 से 700 बाक्स खपत होती थी। पर कोरोना संक्रमण व लाकडाउन की वजह से यह आंकड़ा 250 बाक्स पर आ गया है। यही स्थिति ट्रेन की हर ट्रेन में 100 से 200 बाक्स की सप्लाई होती थी, लेकिन अभी बामुश्किल 20 से 25 बाक्स ही खरीद रहे हैं। इसी के चलते धीरे- धीरे प्लांट में 28 हजार बाक्स रेलनीर डंप हो गया है। एक बाक्स में करीब 12 बोतल रहते हैं। खपत कम होने के कारण ही आइआरसीटीसी से उत्पादन बंद कर दिया है।

और कम हो सकती खपत

स्थिति अभी भी सामान्य नहीं है। स्टाल संचालक धीरे- धीरे स्टालों को बंद करने के फिराक में हैं। कुछ और भी है, जो हाथ खींचने की तैयारी कर रहे हैं। उन्हें स्टाल खुला रखने के लिए रेलवे या आइआरसीटीसी भी दबाव नहीं बना सकता है। यदि वह बंद होते हैं तो रेलनीर की खपत और कम हो जाएगी। इसे लेकर आइआरसीटीसी की चिंता बढ़ गई है।

Posted By: anil.kurrey

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