बिलासपुर(नईदुनिया प्रतिनिधि)। जिले में शिक्षा के अधिकार के तहत प्रवेश लेने के बाद स्कूल छोड़ चुके गरीब छात्र-छात्राओं के नाम से भी शासन से फीस की राशि स्कूलों से ली है। ऐसे निजी स्कूल संचालकों को शिक्षा विभाग ने नोटिस जारी किया गया था। लेकिन दो माह बाद भी किसी ने सकूल शिक्षा विभाग को जवाब नहीं दिया। अफसर द्वारा भी कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है।

जिले के निजी स्कूल संचालक सरकारी योजनाओं का खुलेआम दुरूपयोग करते हुए शासन को लाखों स्र्पये का चूना लगा रहे थे। शिक्षा के अधिकार के तहत निजी स्कूलों में दाखिला लेने वो कई बच्चे टीसी निकलवा चुके हैं। इसके बावजूद स्कूल संचालक उन बच्चों के नाम से शासन से पैसे वसूल रहे थे। ऐसे बच्चों की संख्या करीब पांच सौ है। ये बच्चे रिकार्ड में अभी भी अध्ययनरत हैं। प्राइवेट स्कूल शासन से हर साल निर्धारित शुल्क भी वसूल रहे थे।

इस फर्जीवाड़े की शिकायत मिलने पर जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) डीके कौशिक ने वेरिफिकेशन करवाया, तो मामला खुला। जांच रिपोर्ट मिलने के बाद 500 स्टूडेंट्स को अपात्र घोषित किया गया है। हालांकि, अब तक संबंधित स्कूलों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। न ही उन स्कूलों से फीस वसूली की गई।

वेरिफिकेशन के लिए बनाई गई थी जांच टीम

डीईओ ने आरटीई के तहत निजी स्कूलों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं के वैरिफिकेशन के निर्देश देते हुए चारों ब्लाकों में तीन-तीन सदस्यीय टीम बनाई थी। इसमें ब्लाक के सहायक विकासखंड शिक्षा अधिकारी, सहायक नोडल अधिकारी और एकाउंटेंट शामिल थे। वेरिफिकेशन के बाद डीईओ को जांच रिपोर्ट सौंपी गई थी। इसमें पता चला कि आरटीई के तहत जिले में 500 छात्र-छात्राओं को फर्जी तरीके से शामिल किया गया है। इस पर डीईओ ने उन्हें अपात्र घोषित कर दिया। साथ ही उनका नाम आरटीई के पोर्टल से हटा दिया गया।

Posted By: Abrak Akrosh

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