बिलासपुर। Road Safety Week: शहर के भीतर और मुख्य मार्ग पर अनफिट वाहन बेधड़क दौड़ रहे हैं। इनसे दुर्घटना का खतरा है। इसके बावजूद परिवहन विभाग और यातायात पुलिस नियमित जांच नहीं करते हैं। इसके चलते कार्रवाई का भी खौफ नहीं है। पिकअप, मेटाडोर और आटो की हालत भी कुछ इसी तरह है।

'नईदुनिया" ने वाहनों की फिटनेस को लेकर मुख्य मार्गों की पड़ताल की तो बड़ी संख्या में अनफिट वाहन सड़क पर फर्राटे भरते नजर आए। व्यापार विहार के पास सीजी 10 सीए 4435 क्रमांक की पिकअप खड़ी थी। इसके सामने का हिस्सा पूरी तरह टूटा हुआ था। इस हिस्से को रस्सी से बांधकर रखा गया था। इससे थोड़ी दूर पर ट्रक खड़ा था, जिसका न तो नंबर नजर आ रहा था और न ही रिफलेक्टर लगे थे।

रायपुर मार्ग में हाईटेक बस स्टैंड से लेकर बिल्हा मोड तक दाएं व बाएं दोनों तरफ पांच ट्रक खड़े थे। सड़क किनारे खड़े इन वाहनों ने न तो पीछे के वाहन को संकेत देने के लिए बैक लाइट जलाई थी और न इंडीकेटर। इनमें रिफलेक्टर भी नहीं लगा था। अंधेरे के कारण वाहन नजर ही नहीं आ रहे थे। यही स्थिति बसों की है। मंगला चौक पर चार बसें खड़े थे। इनकी हालत भी बेहद जर्जर थी।

रतनपुर मार्ग पर स्थिति बेहद खतरनाक थी। लोधीपारा में खड़ी पिकअप व ट्रक से मिरर ही गायब थे। बस व भारी वाहनों के अलावा शहर में ऐसी कारें व आटो दौड़ते नजर आईं, जिसमें नंबर ही नहीं थे। यह नियमित जांच नहीं होने का असर है। यदि कार्रवाई होती तो वाहनों में दुर्घटना को न्योता देने वाली यह कमियां नहीं रहती।

ये है जुर्माने का प्रावधान

परिवहन विभाग के अनुसार यदि जांच के दौरान कोई वाहन अनफिट मिलता है तो चालक पर धारा 56 व 192 के तहत अपराध दर्ज होता है। कागजी कार्रवाई पूरी होने के बाद चालक के खिलाफ दो हजार रुपये जुर्माना करने का नियम है। यह पहली बार है। जुर्माने के बाद चालक को चेतावनी देकर छोड़ दिया जाता है। इस चेतावनी के बाद भी वह अनफिट वाहन चलाते मिलते हैं तो जुर्माना बढ़ा दिया जाएगा।

इसी तरह बिना लाइसेंस पर एक हजार, तेज गति से वाहन चलाने पर 500 रुपये, रेस करते पकड़े जाने पर एक हजार रुपये तक जुर्माने का प्रावधान है। बिना बीमा वाले दोपहिया वाहन मालिक के खिलाफ 300 रुपये और अन्य वाहनों के मालिकों पर एक हजार रुपये तक जुर्माने का नियम है।

दो साल में 939 का लाइसेंस निलंबित

परिवहन विभाग के अलावा यातायात पुलिस भी जांच करती है। दो साल में 939 ऐसे वाहन चालक मिले जो मोटर व्हीकल एक्ट के प्रावधानों का उल्लंघन कर रहे थे। गंभीर लापरवाही होने के कारण परिवहन विभाग के माध्यम से चालकों का लाइसेंस निलंबन करने की कार्रवाई की गई। इसमें 2019 में 683 और 2020 में 256 मामले शामिल है।

दोपहिया वाहनों की होती जांच

ट्रक, हाइवा व बस के अलावा फिटनेस जांच का नियम कार, जीप व दोपहिया वाहनों पर लागू होता है। परिवहन विभाग के अनुसार यदि कोई नई गाड़ी खरीदता है तो दो साल तक फिटनेस की छूट होती है। इसके बाद हर साल जांच कराने का प्रावधान है, लेकिन परिवहन विभाग भारी वाहन या बसों के अलावा अन्य वाहनों की जांच नहीं करता और न ही इसके लिए कभी निर्देश जारी किए जाते हैं।

कृषि का रजिस्ट्रेशन और रेत व गिट्टी की परिवहन

परिवहन विभाग में ट्रैक्टर के दो तरह से रजिस्ट्रेशन होते हैं। एक कृषि और दूसरा कमर्शियल। कृषि कार्य के लिए रजिस्ट्रेशन कराने पर टैक्स में छूट है। जबकि कमर्शियल उपयोग में टैक्स लिया जाता है। अधिकांश ट्रैक्टर मालिक कृषि कार्य बताकर रजिस्ट्रेशन कराते हैं।

इसके बाद रेत व गिट्टी का परिवहन जैसे काम में उपयोग किया जाता है। दो साल पहले इस तरह के प्रकरण भी सामने आए थे, लेकिन नियमित जांच नहीं होने के कारण कार्रवाई से बच जाते हैं। इसके अलावा ट्रैक्टर इंजन वाले हिस्से का 15 साल में फिटनेस का प्रावधान है। वहीं, ट्राली का आठ साल दो बार और इसके बाद एक-एक साल के अंतराल में फिटनेस कराना है।

फिटनेस में किसकी होती है जांच

क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय के अनुसार फिटनेस के दौरान वाहनों का एयर फिल्टर, एजेंसी द्वारा निर्मित वाहनों से छेड़छाड, रिफलेक्टर, लाइट, संकेतक, वाइपर, डाले की ऊंचाई, हार्न व टायर की जांच होती है।

ओवरलोड वाहन कम हुए है- हमीद

बिलासपुर ट्रक ओनर एसोसिएशन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष अब्दुल हबीद का कहना है कि जब से ओवरलोड वाहन के चालक, मालिक और लोडिंग होने वाली फैक्ट्री मालिक पर कार्रवाई के निर्देश हुए हैं, इनमें कमी आई है। वाहन के अनफिट होने की एक वजह जर्जर सड़क है। इस पर सुधार की आवश्यकता है। बैक लाइट व रिफलेक्टर के बिना चलने वाले वाहनों के लिए नियमित जांच व कार्रवाई की जाए तो काफी सुधार आएगा।

Posted By: anil.kurrey

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