बिलासपुर (नईदुनिया प्रतिनिधि)।

स्वतंत्र रेलवे बहुजन कर्मचारी यूनियन से जुड़े कर्मचारियों ने निजीकरण के विरोध में शपथ लेते हुए आक्रोश जाहिर किया। रेल अधिकारियों के पास ऑनलाइन सात सूत्रीय मांग भी रखी जिसमें प्रमुख रूप से यात्री ट्रेनों को प्राइवेट कंपनी को देने पर रोक लगाने का मुद्दा था।

यूनियन के महामंत्री बीआर साह ने बताया कि शनिवार को रेल कर्मचारियों ने निजीकरण के खिलाफ शपथ ली। संघर्ष को बनाए रखने नेशनल मूवमेंट टू सेव रेलवे अभियान में शामिल होने हुंकार भरी। वर्ष 1968 से अब तक रेलवे के साथ संघर्ष में जिन रेल कर्मचारियों ने जान गवाई उनके लिए श्रद्धांजलि अर्पित की गई। सचिव शिव कुमार ने कहा कि सात सूत्रीय मांगों में प्रमुख रूप से उत्पादन इकाइयों का निजीकरण बंद करना। एनपीएस समाप्त कर ओपीएस बहाल करना। सर्विस रिव्यू के नाम पर जबरदस्ती सेवानिवृत्त बंद करना। केंद्रीय कर्मचारियों एवं पेंशनरों को महंगाई भत्ता तुरंत देना। ठेका प्रथा पर रोक। बेरोजगार युवाओं को रेलवे के खाली पदों में तत्काल भर्ती करने मांग किया गया है।

कर्मचारियों को बुनियादी सुविधा नहीं

यूनियन के सदस्यों ने यह भी कहा कि पिछले दिनों दो सौ से अधिक रेल कर्मचारी संगठन के साथ जुड़े हैं। जिनकी ज्यादातर शिकायत

मेडिकल, अवकाश, पानी, क्वार्टर की मरम्मत जैसे मूलभूत समस्या को लेकर थी। यानी साफ है कि रेल कर्मचारियों की बुनियादी सुविधाओं पर भी ध्यान नहीं दिया जा रहा है। यह गंभीर बात है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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