Bilaspur News : कोरबा । छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत कंपनी को हर साल लाइन लास की वजह से करोड़ों रुपए का नुकसान उठाना पड़ रहा। इस लास को रोकने अब कंपनी ने कवायद शुरू कर दी है। राज्य के बड़े शहरों में लाइन लास रोकने पृथक से अधिकारियों की अस्थाई नियुक्ति की गई है।

वर्ष 2019-20 में लगभग दो हजार करोड़ यूनिट बिजली खपत हुई। इसमें 28 फीसद यानी 560 करोड़ यूनिट बिजली लाइन लास में व्यर्थ चली गई। वर्तमान में बिजली की कीमत औसत 4.50 रुपए है। इस लिहाज से 2520 करोड़ रुपए लाइन लास में कंपनी को नुकसान हुआ। इसे रोकने 28 अधिकारियों की अस्थाई पदस्थापना की गई है। इन अधिकारियों को 31 मार्च 2021 तक लाइन लास 28 फीसद से घटा कर आठ फीसद लाने का लक्ष्य दिया गया है। प्रदेश में सबसे ज्यादा 40 फीसद लाइन लास अंबिकापुर रीजन का है। कोरबा में 30, बिलासपुर में 28 व रायपुर में 12 फीसद लाइन लास दर्ज किया गया है।

22 बड़े शहरों में चार साल पहले नवीन विद्युतीकरण का कार्य किया गया था, पर इससे लाइन लास से होने वाला नुकसान नहीं रूका। इस नुकसान की रोकथाम के लिए प्रबंधन ने अब अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी है। तकनीकी कारणों के साथ लाइन लास के अन्य वजहों का ब्यौरा तैयार कर इससे निपटा जाएगा। कंपनी से जुड़े अधिकारी दबी जुबान यह कहने से नहीं चूक रहे कि केवल चार माह में 28 से घटा कर सीधे आठ फीसद में लाइन लास को लाना बड़ी चुनौती है।

इन अधिकारियों को दी गई जिम्मेदारी

विद्युत कंपनी ने अतिरिक्त मुख्य अभियंता, अधीक्षण अभियंता व कार्यपालन अभियंता स्तर के अधिकारियों को पदस्थ किया है। रायपुर में पदस्थ अतिरिक्त मुख्य अभियंता (एडीसीइ) संदीप कुमार वर्मा व कार्यपालन अभियंता (ईई) आरके अरोरा को कोरबा पदस्थ किया गया है। इसके साथ ही कांकेर, महासमुंद, मनेंद्रगढ़, कवर्धा, धमतरी, रायगढ़, नैला -जांजगीर व चांपा, भाटापारा, राजनांदगांव, दुर्ग, भिलाई, चरोदा, मुंगेली व चिरमिरी क्षेत्र में भी पदस्थापना की गई है।

बिल जमा नहीं करने में यह क्षेत्र पीछे

बिजली चोरी व बिल जमा करने में आनाकानी के मामले में कवर्धा, मुंगेली, पंडरिया, चांपा-जांजगीर, कोरबा, सराइपाली, बसना का नाम सबसे आगे है। यही वजह है कि बिजली खपत के मुताबिक जितना राजस्व कंपनी को मिलना चाहिए, वह नहीं मिल रहा। बिजली चोरी की वजह से हो रहे लाइन लास को रोकने के लिए विजिलेंस जांच जरूरी है। लगातार कार्रवाई कर इस पर काबू पाया जा सकता है। पुराने तार, खराब मीटर बदलने के साथ उपभोक्ताओं को जागरूक करना होगा।

यह प्रमुख कारण

  • खराब मीटर नहीं बदलना
  • ग्रामीण क्षेत्र की टूटे तार को बार- बार जोड़ना
  • लाइन में हुकिंग कर बिजली लेना
  • पुराने लाइन को नहीं बदलना
  • मीटर में छेड़छाड़ कर बिजली का उपयोग करना

पर्याप्त स्टाफ व आवश्यक संसाधन जरूरी

विद्युत वितरण कंपनी के पूर्व निदेशक एनएच नरवरे का कहना है कि लाइन लास रोकने के लिए अधिकारियों को जिम्मेदारी दी गई है, पर इसके लिए स्टाफ व संसाधन भी उपलब्ध कराया जाना चाहिए। तभी नुकसान का आंकलन कर उसे दूर करने समुचित उपाय तत्काल शुरू किए जा सकेगा भविष्य में यथास्थिति बनाए रखने के लिए वित्तयी वर्ष के प्रारंभ से उपाय करते हुए विभगीय जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। तब लाइन लास पर काबू पया जा सकेगा।

Posted By: anil.kurrey

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