बिलासपुर। शहर की सामाजिक संस्था विश्वाधारंम ने अब ऐसे कार्य की शुरुआत की है जो वास्तव में एक सभ्य समाज की आवश्यकता है। संस्था की नवीन मुहिम संस्कार शाला द्वारा शहर की पिछड़ी बस्ती, स्लम बस्तियों, अटल आवासों एवम सड़क किनारे रह कर जीवन यापन करने वाले परिवार के नन्हें नन्हें बच्चों को नशा मुक्त कर शिक्षा के साथ संस्कारवान बनाने का बीड़ा उठाया है।

इन बस्तियों में रहने वाले बच्चे ज्यादातर पन्नी उठाने, कबाड़ी बीनने और भिक्षा मांगने जाते हैं। उनसे प्राप्त धन राशि का उपयोग नशे के लिए करते हैं। बालपन से नशा की गिरफ्त आए बच्चे जाने अंजाने अनेक अपराध करते हैं। जैसे चोरी करना, बात बात कर लड़ाई करना, एवम अपने हम उम्र बच्चियों का शोषण/अभद्रता करना जैसे अनेक अपराध शामिल हैं।

संस्कार शाला मुहिम की संयोजिका सौम्य रंजीता ने बताया कि उनके द्वारा विगत एक माह से इस मुहिम को शहर की कई पिछड़ी बस्तियों में संचालित किया जा रहा है। उन्होंने बताया की शुरुआत में तो बच्चे नहीं आते थे और जो बच्चे आते थे वो नशे में होते थे। धीरे—धीरे उनको नशा से होने वाले नुकसान को बताकर अध्यात्म का मार्ग और ऐसी अनेक कहानियां बताने से अब लगभग 180 ऐसे बच्चे आने लगे है जो अब लगातार संस्कार शाला आ रहे हैं।

अभी इन बच्चों को मूल शिक्षा जैसे वर्णमल, अल्फाबेट, पहाड़ा, गिनती इत्यादि की शिक्षा दी जा रही है। साथ ही उनके मन को शांत करने के लिए गायत्री मंत्र भी सिखाया जा रहा है। अब यह बच्चे पन्नी उठाने व अन्य सभी असामाजिक गतिविधियों से दूर होने लगे हैं।

संस्था के संस्थापक चंद्रकांत साहू ने बताया की 2022 के अंत तक उनका लक्ष्य है 2,500 ऐसी पिछड़ी बस्तियों के बच्चों को शिक्षा के साथ संस्कारवान बनाकर मुख्यधारा से जोड़ना है।

Posted By: anil.kurrey

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