बिलासपुर। जिले के निजी स्कूल संचालक खेल शुल्क जमा नहीं कर रहे हैं। जबकि स्कूल शिक्षा विभाग से खेल कैलेंडर जारी कर दिया है। इसके साथ ही ब्लाक स्तरीय खेल शुरू हो गया है। विभाग भी शुल्क की वसूलने के लिए कोई पहल नहीं कर रहा है। पर्याप्त राशि नहीं होने से खेल से जुड़े आयोजनों में दिक्कत आने की आशंका है। स्कूल शिक्षा विभाग की ओर से प्रत्येक साल स्कूली छात्र-छात्राओं के लिए शालेय खेल प्रतियोगिता का आयोजन किया जाता है।

इसमें सरकारी स्कूल व निजी स्कूल के बच्चे खेल में भाग लेते हैं। राज्य सरकार ने साल 2012 में निजी व सरकारी स्कूलों से खेल शुल्क जमा करवाने नियम बनाया है। इस राशि से खेलों का आयोजन, बच्चों के खाने व ठहरने, मेडल सहित अन्य व्यवस्था करनी होती है। शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार जिले के सरकारी स्कूल खेल शुल्क जमा कर रहे हैं। लेकिन निजी स्कूल शुल्क जमा करने में लेटलतीफ कर रहे हैं। जिला शिक्षा अधिकारी डीके कौशिक का कहना है कि सभी स्कूलों को खेल शुल्क जमा करने के लिए कहा गया है। राशि जमा नहीं करने वाले स्कूलों की जानकारी जुटाई जाएगी।

प्रति छात्र 50 रुपये है शुल्क

डीईओ ने बताया कि हाई स्कूल स्कूल में प्रति छात्र 50 रुपये खेल शुल्क लिया जाता है। हायर सेकंडरी स्कूल में प्रति छात्र 75 रुपये शुल्क तय है। स्कूल प्रबंधन के द्वारा खेलों के आयोजन के लिए शुल्क की 40 प्रतिशत राशि शिक्षा विभाग में जमा करनी होती है। शिक्षा विभाग द्वारा इस राशि से संकुल स्तरीय, ब्लाक स्तरीय व जिला स्तरीय खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाता है।

प्रवेश के समय ही शुल्क ले लेते हैं स्कूल

निजी स्कूल संचालक प्रवेश के समय ही छात्र-छात्राओं से खेल समेत सभी प्रकार के शुल्क जमा करवा लेते हैं। इसके बावजूद स्कूल शिक्षा विभाग में शुल्क जमा नहीं करते हैं। दूसरी ओर विभाग द्वारा कार्रवाई नहीं करने पर नियम का पालन नहीं किया जा रहा है।

Posted By: Abrak Akrosh

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