बिलासपुर(नईदुनिया प्रतिनिधि)। हाई स्कूल के छात्र-छात्राओं को आयुर्वेदिक चिकित्सा के महत्व के बारे में बताया गया। औषधीय पेड़-पौधों व जड़ी बुटी से अवगत कराया गया। आयुर्वेदिक चिकित्सा से गंभीर बीमारियों को जड़ से खत्म करने की शक्ति होती है। अंग्रेजी दवाई के तुलना में आयुर्वेदिक इलाज का ज्यादा असर होता है। शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय गनियारी के कक्षा 9वीं के हैल्थ केयर के छात्र-छात्राओं को शासकीय आयुर्वेदिक औषधालय गनियारी भ्रमण कराया गया।

इस दौरान आयुर्वेद चिकित्सा अधिकारी विशेषज्ञ डा. कोमल डोटे ने विद्यार्थियों को आयुर्वेदिक चिकित्सा एवं आयुर्वेद का महत्व बताया। साथ ही औषधीय पौधों और जड़ी-बूटी को दिखाकर उनसे होने वाले इलाज से अवगत कराया गया। चिकित्सा के साथ ही जैव अपशिष्ट प्रबंधन के बारे में व्यापक जानकारी प्रदान की गई। यह प्रयास बच्चों को भविष्य में आयुर्वेदिक चिकित्सक बनने एवं चिकित्सा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने में महत्वपूर्ण साबित होगा। इस दौरान डा. कोमल डोटे ने बताया कि आयुर्वेदिक चिकित्सा का उपयोग प्राचीन काल से किया जा रहा है। समय के साथ-साथ अंग्रेजी दवा का उपयोग भी करने लगे।

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आयुर्वेदिक इलाज किसी भी बीमारी को जड़ से नष्ट करता है। इसमें मरीज को ज्यादा परेशानी का सामना करना भी नहीं पड़ता है। कोरोना काल के बाद आयुर्वेदिक इलाज के महत्व को लोगों ने समझा है। स्वस्थ रहने के लिए आयुर्वेदिक दवा का ज्यादा उपयोग किया जा रहा है। कोरोना काल में अधिकांश लोगों ने काढ़ा बनाकर रोजाना पीया। इससे लोगों के शरीर से कई प्रकार के रोग खत्म हुआ। साथ ही साथ शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता में बढ़ोतरी भी हुई है। जड़ी बूटियां प्रकृति से बनी होती हैं। इसलिए इसका असर ज्यादा होता है। उन्होंने कहा कि अब पश्चिम के लोग भी इस बात को समझ रहे हैं।

Posted By: Abrak Akrosh

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