बिलासपुर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। शनि अमावस्या पर शुक्रवार को शनिदेव का पूजन किया गया। वहीं मंदिरों के पट भक्तों के लिए बंद रहे। इससे उन्हें निराशा हुई। इसके बाद भी मंदिरों में सुबह से शनिदेव के दर्शन की आस में श्रद्घालु पहुंचते रहे। ऐसे में श्रद्घालुओं ने मंदिर के पट को नमन किया और मंदिर परिसर में लगे पीपल के वृक्ष का पूजन किया। वहीं कुछ मंदिरों में शारीरिक दूरी का पालन करते हुए पूजन किया गया।

शुक्रवार को ज्येष्ठ अमावस्या को शनि अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है। इसी तिथि में न्याय के देवता और सूर्य पुत्र शनिदेव की जयंती मनाई जाती है। शनि जयंती शनि पीड़ित जातकों के लिए शुभ अवसर होती है। जब वे उनका पूजन कर अपने कष्टों से मुक्ति की कामना करते है। ऐसे में शुक्रवार को जातकों ने घरों में पूजा-अर्चना और हवन पूजन किया। कोरोना संकट के कारण लॉकडाउन की स्थिति चल रही है। ऐसे में मंदिरों में पट बंद हैं। फिर भी राजकिशोर नगर और चिल्हाटी स्थित शनि मंदिर लोग पहुंचे। राजकिशोर नगर में जहां मंदिर परिसर में लगे पीपल वृक्ष का पूजन श्रद्घालुओं ने किया। वहीं शाम को मंदिर के पुजारी के मार्गदर्शन में सभी श्रद्घालुओं के नाम से सामूहिक हवन-पूजन और पाठ किया। वहीं चिल्हाटी स्थित शनि मंदिर में मध्य रात्रि से लेकर शुक्रवार की शाम तक पूजन हुआ। मंदिर समिति की ओर से रात्रि दो बजे से विशेष पूजन और अभिषेक किया गया। शनिदेव की प्रिय वस्तु काले तिल, उड़द, नारियल, लोहा, नैवेद्य सहित अनेक वस्तुओं का दान कर उन्हें प्रसन्न करने का प्रयत्न किया। शनि देव को नीले फूल प्रिय हैं इसलिए उन्हें नीला फूल अर्पित कर दीपदान भी किया गया।

Posted By: Nai Dunia News Network

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