बिलासपुर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। अभिजीत मुहूर्त में सोमवार को देवी मंदिरों में घटस्थापना हुई। प्रथम दिवस भक्त माता शैलपुत्री स्वरूप की पूजा-अर्चना में लीन नजर आए। इसके साथ ही नौ दिनों का कठोर व्रत भी आरंभ हुआ। आदिशक्ति मां महामाया मंदिर रतनपुर में दर्शन के लिए भक्तों का तांता लग गया। कोरोना महामारी के दो साल बाद सभी देवी मंदिरों में भीड़ नजर आई।

नवरात्र आरंभ होने के साथ बिलासपुर में 10 दिनी दुर्गा उत्सव प्रारंभ हो चुका है। अभिजीत मुहूर्त में मंदिरों व घरों में घटस्थापना की गई। इसके बाद दिव्य ज्योति कलश जगमगा उठा। आदिशक्ति मां महामाया मंदिर रतनपुर सहित काली मंदिर तिफरा, सरकंडा स्थित श्रीपीतांबरा पीठ मां बगलामुखी देवी मंदिर, सतबहिनिया मंदिर, बंधवापारा, हरदेव लाल मंदिर, शनिचरी, मां काली मंदिर कुदुदंड, दुर्गा मंदिर जरहाभाठा, दुर्गा मंदिर दयालबंद, दुर्गा मंदिर पुलिस लाइन, दुर्गा मंदिर, जवाली पुल, महामाया मंदिर, गणेश नगर एवं त्रिपुर सुंदरी मंदिर कोतवाली, मरीमाई मंदिर रेलवे परिक्षेत्र न्यू लोको कालोनी में दर्शन करने भक्तों की भीड़ उमड़ रही है। इसके अलावा शंकर नगर स्थित मां नष्टी भवानी मंदिर दर्शन करने भक्त पहुंचे। देवी जसगीत के साथ शहर के 40 से अधिक स्थानों पर नवदुर्गा की प्रतिमा स्थापित की गई है। मंदिर में रंग-रोगन के साथ आकर्षक विद्युत साज सज्जा की गई है।

आज ब्रम्हाचारिणी स्वरूप की होगी पूजा

नवरात्र में प्रतिदिन देवी के अलग-अलग रूपों की पूजा होती है। ज्योतिषाचार्य पंडित मनोज तिवारी का कहना है कि दूसरे दिन ब्रम्हाचारिणी फिर चंद्रघंटा, कूष्णांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी व नवमी के दिन सिद्धदात्री स्वरूप की पूजा-अर्चना होगी। भक्त नौ दिनों तक कठोर व्रत का पालन करेंगे। षष्ठी तिथि से शहर में रौनक और बढ़ जाएगी। विजयादशमी तक यह उत्सव जारी रहेगा।

रतनपुर में दो साल बाद आस्थावानों की लंबी कतार

शारदीय नवरात्र के पहले ही दिन आदिशक्ति मां महामाया मंदिर रतनपुर में घटस्थाना के बाद भक्तों के लिए मंदिर का पट खोल दिए गए। कोरोना महामारी के दो साल बाद प्रथम दिवस बड़ी संख्या में भक्त दर्शन के लिए पहुंचे। माता के दरबार में प्रतिदिन अब भक्त सुबह पांच बजे से रात 12 बजे तक दर्शन कर सकेंगे। वहीं इस बार जसगीत भी प्रारंभ कर दिया गया है। प्रतिदिन रात नौ बजे से सुबह चार बजे तक मंडली के द्वारा जसगीत का आयोजन होगा। यज्ञ भी प्रारंभ है। मंदिर ट्रस्ट के मैनेजिंग ट्रस्टी अरुण शर्मा ने बताया कि इस बार भीड़ को देखते हुए व्यवस्था बनाई गई है शारदीय नवरात्र होने की वजह से काफी भीड़ होने की संभावना है। इस पर मंदिर ट्रस्ट के सभी पदाधिकारी के साथ सहयोगी व्यवस्था में लगे हुए है। महामाया मंदिर ट्रस्ट के द्वारा लोगों की सुविधा के लिए पेयजल एवं ठहरने के लिए निशुल्क धर्मशाला व्यवस्था की गई है। इस साल 25,000 ज्योति कलश प्रज्जवलित किए गए हैं। इसमें 2900 घी के और 20,000 तेल के 1190 आजीवन मनोकामना दीप प्रज्वलित हैं। भोग भंडारा जारी है। मेले सा माहौल है।

मंत्रोपचार के साथ श्री दुर्गा सप्तशती पाठ

देवी मंदिरों में माता की आराधना शुरू हो गई। सरकंडा स्थित ब्रह्मशक्ति बगलामुखी देवी को प्रसन्न् करने मंत्रोपचार के साथ दुर्गा सप्तमी पाठ शुरू हो चुका है। वहीं सभी देवी मंदिरों में देवी जपात्मक यज्ञ, सहस्त्रनाम पाठ, श्री दुर्गा सप्तशती पाठ ,श्री सूक्त षोडश मंत्र द्वारा अभिषेक आदि कार्यक्रम नवरात्र पर्व पर वैदिक ब्रह्मणों के द्वारा निरंतर चलता रहेगा।

Posted By: Abrak Akrosh

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