बिलासपुर(नईदुनिया प्रतिनिधि)। मेडिकल कालेज सिम्स के जूनियर डाक्टरों का सोमवार को भी मानदेय बढ़ाने की मांग को लेकर हड़ताल जारी है। इस दौरान सभी डाक्टर मरीजों का इलाज करना बंद कर दिया है। ओपीडी में भी शामिल नहीं हो रहे हैं। इसके चलते मरीजों का इलाज प्रभावित है।

व्यवस्था हुई चौपट

सिम्स की पूरी व्यवस्था चौपट हो गई है। पूरा कार्यभार वार्ड ब्वाय, नर्स व सीनियर डाक्टरों पर है। हड़ताल के चलते तरीज परेशान हैं। दूसरी ओर सिम्स के डीन डा. केके सहारे ने प्रदर्शन कारी जूनियर डाक्टर से बातचीत करने कोशिश की, लेकिन बेनतिजा रहा।

सिम्स हास्पिटल के जूनियर डाक्टर एशोसिएशन की अध्यक्ष डा. चंचल लहरी ने बताया कि मानदेय बढ़ाने की हमारी मांग पूर्णतया न्यायसंगत है। देश के अलग-अलग राज्यों के सभी मेडिकल कालेजों में जूनियर डाक्टर्स को मिलने वाली मानदेय छत्तीसगढ़ के मेडिकल कालेजों से कहीं ज्यादा हैं। बार-बार इस ओर शासन का ध्यानाकर्षण विभिन्न् पत्रों एवं आंदोलनों से करने के बावजूद केवल आश्वासन ही मिला है। डा. चंचल लहरी ने आगे बताया कि हम अपनी जिम्मेदारी समझते हैं और ये जानते है।

हमारे ऐसे आंदोलनों से मरीजों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। दूरस्थ क्षेत्रों से काफी संख्या में सिम्स पहुंचने वाले ग्रामीण मरीजों को समय पर सही चिकित्सकीय सेवा न मिल पाने की स्थिति में उनको होने वाली परेशानियों की पीड़ा हम भी महसूस कर सकते हैं। जिम्मेदारी शासन की भी बनती है। इसलिए हम शासन तक ये संदेश पहुंचाना चाहते हैं। हमारे मांगों के विषय मे गंभीरता पूर्वक विश्लेषण कर यथासंभव यथाशीघ्र फैसला लें। ताकि चिकित्सा जैसी आवश्यक सेवा लंबे समय तक बाधित न हो, वर्तमान परिदृश्य में अपनी मांगों को लेकर जूनियर डाक्टर्स एसोसिएशन ने केवल ओपीडी की सेवाओं का बहिष्कार करने का निर्णय लिया है।

दूसरे राज्यों में इतना मिलता है मानदेय

पश्चिम बंगाल- 29 हजार रुपये

उडीसा- 28 हजार रुपये

दिल्ली- 26 हजार 300 रुपये

केंद्रीय संस्थान- 26 हजार 300 रुपये

झारखंड- 23 हजार पांच सौ रुपये

हिमांचल प्रदेश- 20 हजार रुपये

बिहार- 20 हजार रुपये

गुजरात- 18 हजार दो सौ रुपये

राजस्थान- 17 हजार रुपये

डाक्टरों ने ये कहा

  • छत्तीसगढ़ राज्य के अधिकतर चिकित्सा महाविद्यालय में स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम संचालित नहीं हैं। कनिष्ठ स्तर पर चिकित्सकों की भारी कमी होने के कारण मरीजों के उपचार का कार्य वरिष्ठ चिकित्सकों की देखरेख में इंर्टन्स द्वारा ही किया जाता है। इस तरह से इंटर्न चिकित्सा महाविद्यालयों में मरीजों को बेहतर इलाज उपलब्ध कराने के लिए एक महत्वपूर्ण कड़ी हैं।
  • स्नातकोत्तर छात्रों की अनुपलब्धता साथ ही वरिष्ठ चिकित्सकों की कमी के कारण सामान्यत उनकी देखरेख में आकस्मिक चिकित्सा व्यवस्था भी हम इंर्टन्स द्वारा ही बनाई जाती है।
  • राज्य के चिकित्सा महाविद्यालयों में परिचारिकाओं की भी अत्यंत कमी है। ऐसी स्थितियों में लगभग सभी शासकीय चिकित्सा महाविद्यालयों में परिचारिकाओं की अनुपस्थिति में सामान्य चिकित्सकीय कार्य भी इंर्टन्स द्वारा ही किया जाता है।

  • राज्य के लोगों को समुचित चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए हम इंटर्न 24 से 48 घंटे बिना थके व रुके कार्य करते हैं।
  • कई बार हमें निर्धारित समयावधि में अवकाश भी नहीं मिल पाता है।
  • किसी भी चिकित्सा महाविद्यालय में हम किसी भी प्रकार की आकस्मिकता के लिए प्रथम पंक्ति पर तैनात रहते हैं।
  • कोविड जैसी महामारी के समय भी हम इंर्टन्स चिकित्सा छात्रों ने अन्य सभी वरिष्ठ चिकित्सकों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर मुकाबला कर रहे थे।

हमें स्टाइपेंड इतना कम दिया जा रहा है।

वर्तमान में मंहगाई की दर भी अत्यधिक हो जाने के कारण दी जा रही राशि अपर्याप्त हो रही है।

राज्य की चिकित्सा सुविधा व्यवस्था में महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं। अन्य राज्यों ने चिकित्सा छात्रों के हित को ध्यान में रखते हुए उनके स्टाइपेंड में वृद्धि की है। स्टाइपेंड 12500 से बढ़ा कर 25000 रुपये करने की मांग की गई है।

Posted By: Manoj Kumar Tiwari

NaiDunia Local
NaiDunia Local
  • Font Size
  • Close