बिलासपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि

सिरगिट्टी को पेयजल संकट से उबारने के लिए पहले ही 10 करोड़ रुपये की स्वीकृति नगर पंचायत को मिल गई थी। इससे पहले कि काम शुरू हो पाता, शासन ने इसे नगर निगम में शामिल कर दिया है। नतीजतन अब सारे दस्तावेज को फिर से बदला जा रहा है। इससे प्रोजेक्ट का काम पिछड़ गया है। शासन स्तर से ही नए सिरे से वित्तीय स्वीकृति लेनी पड़ रही है।

जिले में पेयजल को लेकर सबसे समस्याग्रस्त जगहों में सिरगिट्टी भी शामिल है। इसका एक बड़ा कारण पास ही मौजूद औद्योगिक क्षेत्र से बड़े पैमाने पर गहरे नलकूप खोदना है। जो जलस्रोतों के बड़े हिस्से का उपयोग कर लेते हैं। ऐसे में पिछली सरकार ने गहरे नलकूप वाले 10 पंप और दो पानी टंकी व पाइप लाइन का काम स्वीकृत किया था। इससे पहले कि सिरगिट्टी नगर पंचायत प्रोजेक्ट पर काम शुरू कर पाती इसे नगर निगम में शामिल करने का आदेश हो गया। नतीजतन नगर पंचायत अब शहर का एक वार्ड बन गया। इससे प्रोजेक्ट के सारे कागजात में नाम बदलना पड़ रहा है। इसके अलावा निर्माण एजेंसी भी नगर पंचायत से बदलकर नगर निगम हो गया है। इन कागजी कार्यवाही में ही दो माह का समय लग गया। दस्तावेज तैयार करने के बाद नए सिरे से स्वीकृति के लिए प्रक्रिया अपनाई जा रही है। इस पर फिलहाल प्रशासकीय स्वीकृति मिल चुकी है। वित्तीय स्वीकृति मिलने और टेंडर फाइनल करने में अब भी समय है। सिरगिट्टी का विलय होने से पेयजल की एक बड़ी योजना का लाभ वहां के लोगों को गर्मी के समय में नहीं मिल पाएगा।

सिरगिट्टी की पेयजल योजना के संबंध में नए सिरे से दस्तावेज तैयार करने पड़े। निर्माण एजेंसी नगर पंचायत से हटकर नगर निगम करना पड़ा। इससे कुछ विलंब हुआ। टेंडर की प्रक्रिया चल रही है। वित्तीय स्वीकृति मिलते ही इसे फाइनल कर दिया जाएगा।

अजय श्रीवासन

जल शाखा प्रभारी, नगर निगम

Posted By: Nai Dunia News Network

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